महू भाजपा में चरम पर गुटबाजी : इंदौर से निर्वासित उषा ठाकुर के वर्चस्व को स्वीकार नहीं कर पा रहीं राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार

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इंदौर। इंदौर की दो विधानसभाओं में भाजपा का परचम लहरा चुकीं उषा ठाकुर को जब महू भेजा गया तो कई तरह की शंका-कुशंका जाहिर की गई थी। इसके बावजूद उन्होंने महू में न केवल अपनी जगह बनाई, बल्कि भाजपा को दो बार जीत भी दिलाई। अब उसी उषा ठाकुर को महू में अपनी ही पार्टी के नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

ताजा मामला है रविवार को महू में आयोजित कार्यक्रम का। रविवार को उषा ठाकुर ने महू में 85 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें सीएम डॉ.मोहन यादव शामिल हुए। इस अवसर पर नानाजी देशमुख की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। मौके पर महू की स्थानीय नेता और राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार भी मौजूद थीं। बताया जाता है कि जैसे ही डिजिटल शिलालेख सामने आया वैसे ही कविता पाटीदार का पारा सातवें आसमान पर था। उस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर और विधायक उषा ठाकुर का प्रमुख रूप से नाम था, लेकिन उसमें कविता पाटीदार का नाम नहीं था। इस पर उन्होंने जमकर नाराजगी जाहिर की।

विधानसभा चुनाव में ही खींच गई थी कमान

कविता पाटीदार चूंकि महू की हैं, इसलिए वे महू को अपनी विरासत समझती हैं। इसके बावजूद इंदौर में बनते-बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों के कारण दो बार उषा ठाकुर को महू से चुनाव लड़ने भेज दिया गया। यही वजह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में उषा ठाकुर को अपनी ही पार्टी के नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ा था और इसमें कविता पाटीदार के समर्थकों का नाम सामने आ रहा था। इसके बाद उषा ठाकुर और कविता पाटीदार में दूरी और बढ़ गई। एक-दूसरे के आयोजनों में जाने से भी दोनों परहेज करने लगे।

इंदौर के नेता को बर्दाश्त नहीं कर पा रहीं पाटीदार

कविता पाटीदार के पिता भेरूलाल पाटीदार महू के दिग्गज भाजपा नेता थे। यही वजह है कि पाटीदार इस सीट पर दूसरे का कब्जा बर्दाश्त नहीं कर पा रहीं। अब जरा महू की स्थिति पर गौर करें तो वहां लगातार इंदौर के नेताओं का ही कब्जा रहा है। पहले कैलाश विजयवर्गीय को भेजा गया और उन्होंने अंतरसिंह दरबार को हराया। तब तक उषा ठाकुर इंदौर में विधानसभा एक से विधानसभा तीन पर कब्जा जमा चुकी थीं। इसी बीच कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बेटे आकाश विजयवर्गीय को विधानसभा तीन से लांच करने की जुगत बिठाई और उषा ठाकुर को अपनी विधानसभा महू भेज दिया। इतना ही नहीं दोबारा भी महू से उषा ठाकुर को ही उतारा गया। ऐसे में कविता पाटीदार बौखला गईं। हालांकि कविता पाटीदार को राज्यसभा भेज दिया गया, लेकिन महू से उनका मोह कम होने का नाम नहीं ले रहा।

नियुक्तियों में भी होती रही है बर्चस्व की लड़ाई

उषा ठाकुर ने महू में अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए संगठन में अपने समर्थकों की नियुक्तियां कराती रहती हैं, कविता पाटीदार को इस पर भी आपत्ति है। जिले में उषा ठाकुर ने कुंजालाल निनामा को महामंत्री बनवाया तो पाटीदार ने विजय जाट और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कोटे में लीला संतोष पाटीदार पदाधिकारी बनीं। माना जा रहा है कि लीला भी कविता की समर्थक हैं। सरपंच के चुनाव में भी दोनों ने अपनेअपने प्रत्याशी उतारे थे। कहा तो यह भी जाता है कि अंतरसिंह दरबार ने पाटीदार के प्रत्याशी का समर्थन किया था।

संगठन ने कभी नहीं दिया ध्यान

महू में लंबे समय से चल रही पार्टी में खींचतान पर भाजपा संगठन का कोई ध्यान नहीं है। वहां उषा ठाकुर को न केवल कविता पाटीदार, बल्कि पूर्व विधायक और वर्तमान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से भी संघर्ष करना पड़ता है। दोनों के संबंध भी जगजाहिर हैं। ऐसे में कविता पाटीदार के समर्थकों को भी मंत्रीगुट की तरफ से हवा भरी जाती रही है। भाजपा संगठन ने अगर जल्द ही महू की गुटबाजी को कंट्रोल में नहीं किया तो आने वाले विधानसभा चुनाव में और परेशानी खड़ी हो सकती है।

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