गैस फ्लेरिंग 2024 में रिकॉर्ड स्तर पर, वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट ने जताई गंभीर चिंता

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गैस फ्लेरिंग 2024 में रिकॉर्ड स्तर पर, वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट ने जताई गंभीर चिंता

एक ओर जहां दुनिया के करोड़ों लोग अब भी ऊर्जा की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, वहीं दूसरी ओर तेल उत्पादन के दौरान निकलने वाली प्राकृतिक गैस को जलाकर बर्बाद करने की प्रक्रिया, जिसे गैस फ्लेरिंग कहा जाता है, वह 2024 में 17 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

17 वर्षों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची गैस फ्लेरिंग, 38.9 करोड़ टन उत्सर्जन की  बनी वजह

151 अरब घन मीटर गैस की बर्बादी, 38.9 करोड़ टन CO₂ उत्सर्जन

वर्ल्ड बैंक की ताज़ा रिपोर्ट ‘ग्लोबल गैस फ्लेरिंग ट्रैकर 2025’ के अनुसार, 2024 में 151 अरब घन मीटर गैस फ्लेयर की गई, जिससे लगभग 38.9 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ। यह न सिर्फ जलवायु परिवर्तन को तेज़ करता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा असमानता को भी और गहरा करता है।

समस्या के केंद्र में सिर्फ 9 देश

2024 में हुई कुल गैस फ्लेरिंग का 76% हिस्सा केवल 9 देशों से आया — रूस, ईरान, इराक, अमेरिका, वेनेजुएला, अल्जीरिया, लीबिया, मैक्सिको और नाइजीरिया।
इनमें से रूस, ईरान और इराक अकेले कुल फ्लेरिंग का 46% करते हैं।
वहीं अमेरिका ने गैस फ्लेरिंग की इंटेंसिटी में 50% की कमी दर्ज की है, जो अब दुनिया में सबसे कम है।
2012 में इन 9 देशों की संयुक्त हिस्सेदारी 65% थी, जो अब 76% हो गई है — यह दर्शाता है कि यह समस्या कुछ देशों तक ही सीमित होती जा रही है।

नीतिगत विफलता और तकनीकी अवसर

रिपोर्ट यह बताती है कि जहां वर्ल्ड बैंक से जुड़े देशों ने 2012 से अब तक फ्लेरिंग इंटेंसिटी में औसतन 12% की गिरावट हासिल की है, वहीं गैर-सदस्य देशों में यह 25% बढ़ी है।
ब्राजील, कोलंबिया, मिस्र, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान जैसे देशों ने फ्लेरिंग को न सिर्फ कम किया, बल्कि उसे ऊर्जा, रोजगार और सतत विकास में बदलने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए हैं।

मीथेन उत्सर्जन: एक और गंभीर खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में गैस फ्लेरिंग से 4.6 करोड़ टन मीथेन गैस का भी उत्सर्जन हुआ — जो कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कई गुना अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है।
मीथेन न सिर्फ तापमान वृद्धि को तेज़ करता है, बल्कि स्थानीय वायु प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।

समाधान: राजनीतिक इच्छाशक्ति और सही नीतियां

रिपोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है — गैस फ्लेरिंग को रोका जा सकता है। यह तकनीकी या आर्थिक चुनौती नहीं, बल्कि नीतिगत इच्छाशक्ति की परीक्षा है।
यदि सरकारें और कंपनियां मिलकर ठोस निर्णय लें तो यह अपशिष्ट गैस ऊर्जा, नवाचार और विकास का स्रोत बन सकती है।

निष्कर्ष

गैस फ्लेरिंग का बढ़ता स्तर न केवल पर्यावरणीय संकट, बल्कि नैतिक और सामाजिक विफलता का भी संकेत है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट सभी सरकारों और वैश्विक उद्योगों के लिए एक चेतावनी है कि यदि अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो न ऊर्जा संकट खत्म होगा और न ही जलवायु परिवर्तन थमेगा।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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