यूपी में स्टाम्प और पंजीकरण व्यवस्था होगी आधुनिक, एटीएम से मिलेंगे स्टाम्प पेपर
उत्तर प्रदेश सरकार स्टाम्प और पंजीकरण व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक बनाने जा रही है। अब आम लोग बैंक एटीएम की तरह मशीन से स्टाम्प पेपर निकाल सकेंगे। साथ ही, किरायेदारी समझौतों के पंजीकरण शुल्क में कमी, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन प्रणाली, और भूमि रजिस्ट्री डेटा को राजस्व रिकॉर्ड से जोड़ने जैसी बड़ी पहलें की जाएंगी।

एटीएम से मिलेंगे स्टाम्प पेपर
स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क विभाग जल्द ही ₹10, ₹20, ₹50 और ₹100 मूल्यवर्ग के स्टाम्प पेपर के लिए विशेष एटीएम स्थापित करेगा। इनकी सालाना बिक्री करीब ₹800 करोड़ की है।
संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता
- सरकार क्यूआर कोड आधारित सत्यापन प्रणाली शुरू करेगी।
- कोई भी व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन कर संपत्ति का स्वामित्व, पिछले लेन-देन और विक्रेता की कानूनी स्थिति देख सकेगा।
- ऐतिहासिक स्वामित्व डेटा छह महीने के भीतर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा।
भूमि रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड का एकीकरण
- रजिस्ट्री के तुरंत बाद खरीदार का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो जाएगा।
- अभी इसमें 35-40 दिन लगते हैं।
- इसके लिए पंजीकरण कार्यालयों में राजस्व अधिकारी तैनात किए जाएंगे।
पारिवारिक संपत्ति निपटान होगा आसान
सरकार ₹5,000 के निश्चित शुल्क पर चार पीढ़ियों तक के लिए संपत्ति निपटान की अनुमति देने की योजना बना रही है।
राजस्व और पंजीकरण में तेजी से वृद्धि
- 2017-18 में 16 लाख संपत्ति पंजीकरण हुए थे, जो अब बढ़कर लगभग 50 लाख हो गए हैं।
- स्टाम्प और पंजीकरण से आय 2017 में ₹16,000 करोड़ से बढ़कर अब करीब ₹35,000 करोड़ हो गई है।
शुल्क गणना सरल होगी
वर्तमान में 42 मानदंडों से स्टाम्प शुल्क तय होता है, जिन्हें घटाकर 18-20 तक सीमित किया जाएगा।


