इंदौर भाजपा अध्यक्ष पर रार जारी, दो नंबर की नगर और जिला दोनों पदों पर नजर, जिले के लिए दूसरा गुट भी लगा रहा जोर

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इंदौर। भाजपा के इंदौर नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष के लिए 25 दिसंबर 24 को रायशुमारी हुई थी। इसके बाद से कई सूची बनी। बैठकें हुईं। दिल्ली दरबार में भी पेशी हुई, लेकिन अब तक फैसला नहीं हो पाया। पूरे प्रदेश के दिग्गज नेताओं की जिद के कारण ही अब तक सिर्फ दो जिलों में ही नाम घोषित पाए हैं। इंदौर का मामला मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की जिद के कारण अटका है। पहले जहां वे सिर्फ नगर अध्यक्ष पर राजी थे, अब उन्हें दोनों हाथ में लड्‌डू चाहिए।

उल्लेखनीय है कि रायशुमारी के बाद जब सूची भोपाल पहुंची तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नगर अध्यक्ष के लिए दीपक जैन टीनू के नाम की जिद पकड़ ली। हालांकि इसके लिए विधायक रमेश मेंदोला सहित अधिकांश नेता सुमित मिश्रा के नाम की सिफारिश कर रहे थे। फिर भी बेटे आकाश की जिद के कारण कैलाश विजयवर्गीय टीनू के नाम पर अड़े रहे। जैसे ही दो नंबर के ही दूसरे नेताओं को टीनू के नाम फाइनल होने की बात पता चली तो विरोध शुरू हो गया। रायशुमारी में भी सबसे ज्यादा लोगों ने सुमित मिश्रा का नाम दिया था। विरोध होता देख मंत्री विजयवर्गीय ने फिर पैंतरा बदला और टीनू के सिर से हाथ हटाते हुए सुमित के सिर पर रख दिया।

नगर और जिला दोनों पदों के लिए अड़ा मंत्री गुट

इससे पहले लगभग यह तय हो गया था कि नगर का पद मंत्री विजयवर्गीय खेमे को दे दी जाए और जिले में मंत्री तुलसी सिलावट और अन्य विधायकों की बात रख ली जाए, लेकिन विजयवर्गीय ने इसमें भी पेंच फंसा दिया। वर्तमान जिला अध्यक्ष चिंटू वर्मा की नियुक्ति विजयवर्गीय ने ही कराई थी। चूंकि चिंटू को अभी एक साल भी नहीं हुए हैं, इसलिए वे पार्टी द्वारा तय चार साल के बंधन में भी नहीं आ रहे थे। उनका जिला अध्यक्ष बने रहना आसान था, लेकिन टीनू के चक्कर में विजयवर्गीय ने तब चिंटू की बलि देने का फैसला कर लिया था। जब अपने ही गुट में विरोध बढ़ा तब विजयवर्गीय दबाव बनाने लगे कि टीनू को रहने दो और मुझे सुमित मिश्रा और चिंटू वर्मा दे दो। सूत्र बताते हैं कि विजयवर्गीय ने वरिष्ठ नेताओं से यहां तक कह दिया कि इसके अलावा उन्हें प्रदेश में कोई पद नहीं चाहिए।

तुलसी की तरफ से सिंधिया ने भी लगाया जोर

सूत्र बताते हैं कि इस रस्साकशी में मंत्री तुलसी सिलावट भी कमजोर नहीं पड़ रहे। उन्होंने जिला अध्यक्ष के लिए अंतर दयाल का नाम दिया था। विधायक उषा ठाकुर, मनोज पटेल और मधु वर्मा की भी इस पर सहमति थी। ऐसे में यही तय हुआ था कि नगर का पद विजयवर्गीय ले जाएं और जिले का पद तुलसी सिलावट और अन्य विधायकों की मर्जी से तय हो। अब जब कैलाश विजयवर्गीय ने पैंतरा बदला तो तुलसी सिलावट ने भी जोर लगाया। बताया जा रहा है कि तुलसी के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी वरिष्ठ नेताओं से बात की है।

बदली हुई परिस्थितियों में राजनीतिक संतुलन जरूरी

हाल ही में पार्षद कमलेश कालरा और महापौर परिषद के पूर्व सदस्य जीतू यादव के विवाद ने पूरे देश में भाजपा की किरकिरी कर दी है। दो नंबर विधानसभा के जीतू यादव की करतूत के बाद इंदौर में जो कुछ भी हुआ उससे अब राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की बात की जाने लगी है। खुद सीएम डॉ.मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी नहीं चाहते कि इंदौर में राजनीतिक संतुलन बिगड़े। ऐसे में यह बात उठने लगी है कि अगर दो नंबर खेमे को दोनों पद दे दिए जाते हैं तो इससे बहुत ही खराब मैसेज जाएगा और पूरे शहर में एक ही गुट का कब्जा हो जाएगा। ऐसे में भाजपा संगठन के सामने भी इंदौर के नामों की घोषणा एक बड़ी चुनौती है।

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