आपातकाल की पूर्व संध्या पर बोले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह-कांग्रेस को अधिकार नहीं है लोकतंत्र पर सवाल उठाने का

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नई दिल्ली। देश में आपातकाल लगाए जाने के पूर्व संध्या पर एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। शाह ने कहा कि इस देश में कोई तानाशाही बर्दाश्त नहीं कर सकता। भारत लोकतंत्र की जननी है। उस समय आपातकाल को कोई पसंद नहीं करता था, सिवाय तानाशाहों और उस छोटेसे संकुचित समूह के जिन्हें फायदा हुआ था। कांग्रेस को क्या अधिकार है लोकतंत्र पर सवाल उठाने का शाह ने कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस पार्टी ने देश में लोकतंत्र की हत्या करने का काम किया था, आपको क्या अधिकार है, लोकतंत्र पर सवाल उठाने का।

शाह ने कहा कि सुबह 8 बजे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा की कि राष्ट्रपति ने आपातकाल लगा दिया है। क्या संसद की मंजूरी ली गई? क्या कैबिनेट की बैठक बुलाई गई? क्या विपक्ष को भरोसे में लिया गया? जो आज लोकतंत्र की बात करते हैं, मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि वे उस पार्टी से जुड़े हैं जिसने लोकतंत्र को खत्म किया। जो वजह बताई गई वह राष्ट्रीय सुरक्षा थी, लेकिन असली वजह सत्ता की सुरक्षा थी। इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, लेकिन उनके पास संसद में वोट देने का अधिकार नहीं था। उनके पास प्रधानमंत्री के रूप में कोई अधिकार नहीं था।

संविधान का मूल स्वरूप ही बदल दिया

अमित शाह ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान (इंदिरा) गांधी ने संविधान में इतने बदलाव किए कि इसे मिनी संविधान बताया गया। संविधान की प्रस्तावना बदल दी, आर्टिकल 14 बदल दिया, 7वां शेड्यूल बदल दिया। 40 अलगअलग कानून बदल दिए गए और नए अनुच्छेद डाले गए। नए खंड डाले गए और 45वां संविधान संशोधन ने तो इंतिहा ही कर दी। संविधान के मूल स्वरूप को ही बदल दिया।

मेरे गांव से ही 184 लोग जेल गए थे

शाह ने कहा कि मेरे गांव से ही 184 लोग जेल गए थे। मैं उस दिन और उन दृश्यों को मरने तक नहीं भूलूंगा। केवल आजाद होने के विचार के लिए जेल जाना, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि वह सुबह भारत के लोगों के लिए कितनी निर्दयी रही होगी। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, आपातकाल को एक वाक्य में परिभाषित करना मुश्किल है। मैंने इसका एक अर्थ निकाला है। एक लोकतांत्रिक देश के बहुपक्षीय लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने की साजिश ही आपातकाल है।

राजमाता को 4 पागलों के बीच जेल में डाला

शाह ने कहा कि यह दिन हमें कभी भूलने नहीं देना है. क्योंकि यह वही वक्त था जब राजमाता सिंधिया को 4 पागलों के बीच जेल में डाल दिया गया। जय प्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, अटल जी, आडवाणी जी, नानाजी देशमुख, फर्नांडिस जी, आचार्य कृपलानी जैसे वरिष्ठ नेता, ये सब जेल की काल कोठरियों में डाल दिए गए। किसी को कोई मौका नहीं दिया गया और आने वाले समय में गुजरात और तमिलनाडु की गैर कांग्रेसी सरकारों को भी गिराने का काम किया।

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