पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश और बाढ़ का कहर जारी , 50 से अधिक लोगों की मौत, लाखों प्रभावित
पूर्वोत्तर भारत में मानसून ने विकराल रूप ले लिया है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम सहित सभी राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

9 लाख से अधिक लोग प्रभावित, हजारों बेघर
लगातार मूसलाधार बारिश से लगभग 9 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। 1,500 से अधिक गांव जलमग्न हो गए हैं, सैकड़ों घर ढह गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। हजारों लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
अब तक 50 मौतें, सबसे अधिक असम में
बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं में अब तक कम से कम 50 लोगों की मौत हो चुकी है:
- असम: 19
- अरुणाचल प्रदेश: 12
- मेघालय: 6
- मिजोरम: 5
- सिक्किम: 4
- त्रिपुरा: 2
- नगालैंड व मणिपुर: 1-1
सड़क और रेल मार्ग प्रभावित, कई मार्ग बंद
राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर भूस्खलन और जलभराव से आवाजाही ठप हो गई है। दक्षिणी असम के सिलचर और खाकर क्षेत्रों में रेल सेवाएं बाधित हुई हैं। कई ट्रेनें रद्द, परिवर्तित या सीमित की गई हैं। बदरपुर-लुमडिंग रेल खंड को खतरा उत्पन्न हुआ है, हालांकि रेल यातायात अभी चालू है।
सिक्किम में फंसे पर्यटकों को निकालने में बाधा
उत्तर सिक्किम के चाटन में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 113 सैलानी फंसे हुए थे। सेना और वायुसेना ने उन्हें लाचेन गांव तक पहुंचाया, लेकिन यह गांव भी भूस्खलन से पूरी तरह कट गया है। खराब मौसम के कारण राहत अभियान फिलहाल रोकना पड़ा है।
अरुणाचल के 23 जिलों में संकट, सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त
अरुणाचल प्रदेश के 23 जिलों में 3,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सबसे बुरी तरह चांगलांग जिला प्रभावित है जहां 2,231 लोग बेघर हुए हैं और 212 घरों को नुकसान हुआ है। लिकाबाली-आलो राजमार्ग सहित कई प्रमुख रास्ते बंद हैं और कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
दक्षिण बंगाल में भी भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने दक्षिण बंगाल और उप-हिमालयी जिलों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी दी है। दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरद्वार जिलों में बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
निष्कर्ष
पूर्वोत्तर भारत इस समय भीषण मानसूनी आपदा का सामना कर रहा है। सरकार और सेना राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन मौसम की मार, भूस्खलन और बाढ़ ने राहत अभियानों को कठिन बना दिया है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।




