आदिवासियों की हक की लड़ाई लड़ते रहने वाले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन, दिशोम गुरु के नाम से प्रसिद्ध रहे

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नई दिल्ली। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 81 वर्ष की आयु में आज निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। यहां उनका डेढ़ महीने से इलाज चल रहा था। वे झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता हैं। उनके निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने दुख व्यक्त किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुजी का पार्थिव शरीर आज शाम रांची पहुंचेगा, कल विधानसभा में दर्शन के लिए रखा जाएगा। कल शाम रामगढ़ के नेमरा में अंतिम संस्कार किया जाएगा। नेमरा गुरुजी का पैतृक गांव और जन्मस्थान है।शिबू सोरेन को किडनी संबंधी समस्याओं के चलते जून के आखिरी हफ्ते में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिता के निधन की जानकारी एक्स पर दी। शिबू सोरेन, जिन्हें ‘दिशोम गुरु’ के नाम से भी जाना जाता था, झारखंड की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ रहे हैं। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैनर तले आदिवासियों के हक और अधिकार के लिए कड़ा संघर्ष किया। झारखंड के मुख्यमंत्री और शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर अपने भावुक संदेश में लिखा कि आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं।

11 बार के सांसद, तीन बार सीएम

एक सामान्य शिक्षक के घर जन्मे शिबू सोरेन ने पिता की हत्या के बाद राजनीति में प्रवेश किया। फिर झारखंड राज्य के गठन के लिए 40 साल से ज्यादा समय तक संघर्ष किया। साल 2000 में झारखंड राज्य के गठन के बाद से शिबू सोरेन तीन बार सीएम बने। अब उनके पुत्र हेमंत सोरेन झारखंड के सीएम हैं।

रामगढ़ के पास नेमरा में हुआ था जन्म

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ के पास स्थित नेमरा गांव में सोबरन मांझी के घर हुआ था। शिबू के पिता सोबरन मांझी पेशे से शिक्षक थे। उनके दादा चरण मांझी तत्कालीन रामगढ़ राजा कामाख्या नारायण सिंह के टैक्स तहसीलदार थे। शिबू सोरेन जब कुछ बड़े हुए तो उनके परिवार ने उन्हें पढ़ने के लिए गांव से दूर एक हॉस्टल में रख दिया। जहां उनके साथ उनके बड़े भाई राजाराम सोरेन भी थे। हॉस्टल में पढ़ाई करने के दौरान शिबू सोरेन के पिता की हत्या कर दी गई। पिता की हत्या के बाद शिबू सोरेन राजनीति में आ गए।

दुमका से लड़ा लोकसभा चुनाव

1980 के दशक में शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति के जाने-पहचाने नाम हो चुके थे। 1980 के लोकसभा चुनाव में वो दुमका से तीर-धनुष चुनाव चिह्न लेकर मैदान में उतरे। शिबू सोरेन ने 1980, 1989, 1991, 1996, 2002, 2004, 2009 और 2014 में दुमका लोकसभा सीट के लिए चुनावी जीत हासिल की।

जेल जाने पर छोड़ा था सीएम पद

शिबू सोरेन तीन बार राज्यसभा के लिए भी चुने गए। केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। 2 मार्च 2005 को शिबू सोरेन पहली बार झारखंड के सीएम बने, लेकिन 11 मार्च 2005 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद शशिनाथ हत्याकांड में नाम आने पर उनकी मुश्किलें बढ़ गई थीं। वो इस मामले में जेल भी गए और फिर ऊपरी अदालत से दोषमुक्त हुए। इसके बाद 27 अगस्त 2008 को दूसरी बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन तमाड़ विधानसभा चुनाव में हार के कारण 11 जनवरी 2009 को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2009 दिसंबर में तीसरी बाद सीएम बने,लेकिन कुछ ही दिनों में त्यागपत्र देना पड़ा।

आदिवासियों के हक के लिए लड़ते रहे

साल 1972 में शिबू सोरेन और उनके साथियों ने एक राजनीतिक दल बनाने का फैसला किया, जिसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन हुआ। इसके बाद उन्होंने 1977 में पहली बार चुनाव लड़ा। आदिवासियों के लिए अलग राज्य बनाना उनका सपना था। शिबू सोरेन ने अलग झारखंड की मुहिम चलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने अलग राज्य के लिए लंबा आंदोलन चलाया और पूरी राजनीति इसके लिए समर्पित कर दी। शिबू सोरेन ने सूदखोरों और महाजनों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था, जिसका असर बिहार के अलावा देश के तमाम राज्यों में दिखा। इसके बाद उनकी लोकप्रियता आदिवासी समुदाय में काफी बढ़ती गई। खेतों और जमीन को लेकर उनके आंदोलनों के बाद लोग उन्हें गुरु और दिशोम गुरु के नाम से पुकारने लगे।

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