सरकारी बस से ‘मणिपुर’ नाम हटाने के विरोध में बंद का व्यापक असर, सीओसीओएमआई ने की उच्च स्तरीय जांच और इस्तीफों की मांग
मणिपुर में ‘मणिपुर अखंडता के लिए समन्वय समिति’ (COCOMI) द्वारा आहूत 48 घंटे के राज्यव्यापी बंद का इंफाल घाटी में व्यापक असर देखने को मिला। शुक्रवार को बंद के दूसरे दिन घाटी के पांच जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान, सरकारी और निजी कार्यालय बंद रहे, जबकि सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप रहा।

आपात सेवाओं और महोत्सव को मिली छूट, सुरक्षा बलों पर कार्रवाई की मांग
बंद के दौरान केवल चिकित्सा आपात स्थिति और शिरुई लिली महोत्सव में भाग लेने वाले लोगों को यात्रा की अनुमति दी गई। वहीं, बिष्णुपुर और थौबल जिलों में महिला प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के वाहनों को रोककर उनके विंडशील्ड पर “मणिपुर/कंगलीपाक” नाम चिपका दिया। ‘कंगलीपाक’ मणिपुर का ऐतिहासिक नाम है।
सड़कों से दुकानें हटवाई गईं, रात में निकाला मशाल जुलूस
कुछ क्षेत्रों में दुकानें खुलने लगी थीं, जिन्हें बंद समर्थकों ने फिर बंद करवा दिया। इंफाल के विभिन्न इलाकों में मशाल जुलूस भी निकाले गए, जहां “मणिपुर को नष्ट नहीं किया जा सकता” जैसे नारे लगे। राजधानी के संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।
पत्रकारों की बस से ‘मणिपुर’ नाम ढकने का मामला बना विवाद की जड़
विवाद की जड़ उस घटना को माना जा रहा है, जब पत्रकारों को शिरुई लिली महोत्सव के लिए ले जा रही सरकारी बस के विंडशील्ड से ‘मणिपुर’ शब्द को कवर करने का आरोप सुरक्षाबलों पर लगा। सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है जो 15 दिनों में रिपोर्ट देगी। यह समिति घटना की जांच के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय भी सुझाएगी।
COCOMI ने जताया गहरा आक्रोश, की इस्तीफों और माफी की मांग
COCOMI के संयोजक खुरैजम अथौबा ने कहा कि “मणिपुर को सरकारी बस से हटाना मणिपुर विरोधी निर्णय है, जो राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पर हमला है।” समिति ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से सार्वजनिक माफी और सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, डीजीपी राजीव सिंह तथा मुख्य सचिव प्रशांत कुमार सिंह से इस्तीफे की मांग की है।
इस घटनाक्रम ने राज्य में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष को और गहरा कर दिया है, जबकि मणिपुर सरकार की जांच समिति की रिपोर्ट पर अब पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं।




