भारत में आर्थिक असमानता की बढ़ती खाई: अमीर और गरीब के बीच फासला चिंताजनक स्तर पर

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भारत में आर्थिक असमानता की बढ़ती खाई: अमीर और गरीब के बीच फासला चिंताजनक स्तर पर

क्रेडिट सुईस वेल्थ रिपोर्ट और फोर्ब्स इंडिया के नवीनतम विश्लेषणों के अनुसार, भारत में पिछले एक दशक में अरबपतियों की संख्या में 300% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके विपरीत, देश की 50% से अधिक जनसंख्या की वास्तविक आय या तो स्थिर रही है या घट गई है, जो आर्थिक असमानता के बढ़ते संकट को उजागर करता है।

अर्थतंत्र | कारवां

आर्थिक विकास का लाभ सीमित वर्ग तक

हालांकि भारत में आर्थिक विकास की गति तेज़ रही है, लेकिन उसका सीधा लाभ एक छोटे से संपन्न वर्ग तक ही सीमित रहा है। इस बढ़ती विषमता को लेकर सामाजिक ताने-बाने पर खतरे की चेतावनी दी जा रही है।

1% अमीरों के पास 11.6 लाख करोड़ डॉलर की संपत्ति

ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट Survival of the Richest के अनुसार, भारत की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा—लगभग 11.6 लाख करोड़ डॉलर—सिर्फ 1% अमीरों के पास है।

आय में भी भारी असमानता

ग्लोबल इनइक्वैलिटी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शीर्ष 10% लोग देश की कुल आय का 57% हिस्सा प्राप्त करते हैं, जबकि निचले 50% लोगों के हिस्से सिर्फ 13% आय आती है।

ऐतिहासिक असमानता की जड़ें

क्रेडिट सुईस की रिपोर्ट बताती है कि भारत में आर्थिक असमानता की प्रवृत्ति स्वतंत्रता के तुरंत बाद से देखी जा रही है। जमींदारी उन्मूलन जैसे सुधार तो हुए, लेकिन उद्योग, व्यापार और राजनीतिक संपर्क वाले वर्ग को ही असली आर्थिक लाभ मिला।

1991 के सुधार और असंतुलित लाभ

1991 के आर्थिक उदारीकरण ने निजी पूंजी, कॉरपोरेट क्षेत्र और वैश्विक निवेश के लिए दरवाजे खोले। लेकिन इसका फायदा तकनीकी, पूंजीगत और शिक्षित वर्ग को हुआ, जबकि श्रमिकों और ग्रामीण समुदायों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।

शेयर बाजार में उछाल, आम लोगों की आय स्थिर

बीएसई-सेंसेक्स में बीते दशक में जबरदस्त उछाल ने अमीरों की संपत्ति को कई गुना बढ़ाया। लेकिन देश की 50% से अधिक आबादी, जिसकी आय श्रम, कृषि और असंगठित क्षेत्र से आती है, को मूल्यवृद्धि या वेतनवृद्धि का लाभ बहुत सीमित रूप में मिला।

निष्कर्ष

भारत की आर्थिक प्रगति के बावजूद आय और संपत्ति की विषमता जिस रफ्तार से बढ़ रही है, वह नीतियों की समावेशिता और सामाजिक न्याय पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो यह दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक असंतुलन का कारण बन सकती है।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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