शिवसेना यूबीटी और मनसे के संभावित गठबंधन पर संशय, मनसे नेता बोले – ‘मजबूत प्रस्ताव आए तभी विचार संभव’

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शिवसेना यूबीटी और मनसे के संभावित गठबंधन पर संशय, मनसे नेता बोले – 'मजबूत प्रस्ताव आए तभी विचार संभव'
शिवसेना यूबीटी और मनसे के संभावित गठबंधन पर संशय, मनसे नेता बोले – 'मजबूत प्रस्ताव आए तभी विचार संभव'

शिवसेना यूबीटी और मनसे के संभावित गठबंधन पर संशय, मनसे नेता बोले – ‘मजबूत प्रस्ताव आए तभी विचार संभव’

महाराष्ट्र की राजनीति में हाल ही में यह अटकलें तेज थीं कि शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच गठबंधन हो सकता है। यदि ऐसा होता, तो राज्य की राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव संभव था। हालांकि अब यह संभावित गठबंधन ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है।

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मनसे नेता संदीप देशपांडे का बयान

मनसे नेता संदीप देशपांडे ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तभी गठबंधन पर विचार करेगी जब शिवसेना (यूबीटी) की ओर से एक “अच्छा और मजबूत” प्रस्ताव आएगा। उन्होंने कहा कि मनसे को अतीत में कई बार धोखा मिला है, इसलिए अब केवल ठोस प्रस्ताव के आधार पर ही आगे बढ़ा जाएगा।

संदीप देशपांडे ने कहा, “अगर शिवसेना यूबीटी को लगता है कि मनसे के साथ गठबंधन संभव है, तो उन्हें एक मजबूत प्रस्ताव देना चाहिए। फिर राज ठाकरे उस पर फैसला लेंगे।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि, “2014 और 2017 में हमने प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन हर बार हमें धोखा मिला। अब अगर वे हमारे साथ गठबंधन चाहते हैं, तो उन्हें पहल करनी होगी।”

देशपांडे ने साफ किया कि, “राज ठाकरे ने यह नहीं कहा है कि गठबंधन ज़रूरी है, बल्कि सिर्फ इतना कहा है कि अगर शिवसेना यूबीटी इच्छुक है, तो उस पर विचार किया जाएगा।”

राजनीतिक पृष्ठभूमि और हालिया घटनाक्रम

बीते महीने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने अपने मतभेद भुलाकर “मराठी मानुस” के हित में साथ आने के संकेत दिए थे। राज ठाकरे ने एक हालिया इंटरव्यू में भी शिवसेना (यूबीटी) के साथ बातचीत की संभावना जताई थी। इन बयानों से गठबंधन की उम्मीदें जगी थीं।

आगामी नगर पालिका चुनावों के मद्देनज़र बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

महाराष्ट्र में इस साल के अंत में मुंबई, ठाणे, नासिक, नागपुर और पुणे सहित कई शहरों में नगर पालिका चुनाव होने हैं। ऐसे में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के संभावित गठबंधन पर राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हैं।

देशपांडे बयान से स्पष्ट है कि मनसे इस बार किसी भी प्रकार की जल्दबाज़ी या समझौते के मूड में नहीं है, और अब गेंद शिवसेना यूबीटी के पाले में है।

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