वाह नकुलनाथजी, सज्जन वर्मा के यहां शोक व्यक्त करने आए और बाकलीवाल के यहां करा लिया स्वागत, पट्ठों के घर याद रहे, लेकिन आठ मौतें भूल गए

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इंदौर। मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ के सुपुत्र पूर्व सांसद नकुलनाथ आज यानी रविवार को इंदौर आए। वे आए तो थे पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा की पत्नी के निधन पर शोक व्यक्त करने, लेकिन लगे हाथ प्रदेश कांग्रेस महासचिव के यहां पहुंचकर स्वागत भी करवा लिया।

कांग्रेस में इस बात की चर्चा है कि जब शोक व्यक्त करने आए थे तो बाकलीवाल के यहां जाकर स्वागत कराने की क्या जरूरत थी। खुद नकुलनाथ ने फेसबुक पर पोस्ट भी किया-आज इंदौर में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं प्रदेश महासचिव विनय बाकलीवाल जी के निवास पर पहुंचकर परिवारजनों एवं प्रदेश से आए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान संगठनात्मक विषयों पर चर्चा करते हुए आपसी संवाद स्थापित किया।

इंदौर आगमन का उद्देश्य ही शोक व्यक्त करना था

नकुलनाथ आज इंदौर में कई स्थानों पर गए। प्रमख रूप से वे शोक व्यक्त करने ही आए थे। नकुलनाथ ने खुद ही फेसबुक पर जानकारी दी है कि वे इंदौर में सज्जन सिंह वर्मा के अलावा पूर्व प्रदेश महामंत्री गजेंद्र वर्मा के यहां भी उनकी माताजी के निधन पर शोक व्यक्त करने गए थे। इसके अलावा इंदौर के प्रतिष्ठित व्यापारी प्रवेश अग्रवाल के निवास पर भी शोक व्यक्त करने गए। प्रवेश अग्रवाल का दीपावली के अगले दिन आग लगने से निधन हो गया था।

अपने समर्थकों के यहां भी पहुंचे

इंदौर प्रवास पर शोक व्यक्त करने के साथ ही नकुलनाथ अपने समर्थकों के यहां भी पहुंचे। विनय बाकलीवाल के यहां पहुंचकर स्वागत और सम्मान करा लिया, वहीं पूर्व पार्षद प्रेम खड़ायता के घर भी पहुंचे। कांग्रेस वाले ही सवाल उठा रहे हैं कि कमलनाथ के पुत्र को शायद यह सूझ नहीं पड़ी कि कहां जाएं या कहां न जाएं। कई नेता तो बाकलीवाल के यहां स्वागत कराने को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। नेताओं का कहना है कि सबको पता है कि विनय बाकलीवाल ने इंदौर में कांग्रेस की नाव किस तरह डुबोई है।

इंदौर की आठ मौतें भूल गए नकुलनाथ

हाल ही में इंदौर में एक बहुत ही हृदयविदारक घटना हुई थी। इसमें आठ लोग आग में जिंदा जल गए थे। यह घटना इतनी बड़ी थी कि सीएम डॉ.मोहन यादव ने तुरंत यहां पहुंचकर परिवारजनों से मुलाकात की थी। नकुलनाथ को यह घटना याद नहीं रही और न ही बाकलीवाल टाइप के उनके समर्थकों ने उन्हें वहां जाने की सलाह दी।

कांग्रेस वाले कह रहे-भागीरथपुरा भी हो आते

कांग्रेस के ही कई नेता कह रहे हैं कि नकुलनाथ को आगे-पीछे अगर पिता की विरासत संभालनी है और प्रदेश की राजनीति करनी है तो भागीरथपुरा भी हो आते। आखिर आए तो थे शोक ही व्यक्त करने। भागीरथपुरा का मामला कांग्रेस ने अच्छा उठाया था और यही वह है कि राहुल गांधी तक यहां आ चुके हैं। अगर नकुलनाथ वहां चले जाते तो निश्चित तौर पर पॉलिटिकल माइलेज मिल सकता था।

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