मॉल मालिक पिंटू छाबड़ा के ‘मायाजाल’ में आईडीए, जिस एनओसी से हुई थी सी 21 बिजनेस पार्क के जमीन की रजिस्ट्री, वह आईडीए के रिकॉर्ड में ही नहीं

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इंदौर। मॉल मालिक पिंटू छाबड़ा की एक और जादूगरी का खुलासा हुआ है। जिस तृष्णा गृह निर्माण संस्था की जमीन पर सी-21 बिजनेस पार्क बना है, उसकी जांच में कई परतें खुलती जा रही हैं। नया खुलासा यह है कि इस जमीन की रजिस्ट्री इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के जिस पत्र के आधार पर करवाई गई है, वह पत्र आईडीए के रिकॉर्ड में है ही नहीं। इससे साफ जाहिर है कि पिंटू छाबड़ा किस कदर आईडीए पर हावी हैं।

उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर शुरू हुई तृष्णा गृह निर्माण संस्था की जांच में लगातार कई खुलासे हो रहे हैं। इसमें सहकारिता विभाग से लेकर टीएनसीपी, आईडीए, नगर निगम सभी विभागों की मिलीभगत उजागर हो रही है। हालांकि सहकारिता विभाग इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है, जिसमें पूरा सौदा ही फर्जी पाया गया है। जिस संस्था ने जमीन बेची, उसका पंजीयन ही निरस्त हो चुका था। सहकारिता विभाग ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा था।

पांच रजिस्ट्री में आईडीए के दो पत्रों का जिक्र

सी-21 बिजनेस पार्क जिस जमीन पर बना है, वह तृष्णा गृह निर्माम से बेबीलोन इंफ्रस्टाक्चर ने खरीदी थी, जिसके वर्तमान कर्ताधर्ता पिंटू छाबड़ा है। इस जमीन की पांच रजिस्ट्री है। इसकी चार रजिस्ट्री पर आईडीए के 21 दिसंबर 1998 के पत्र क्रमांक 1700 का जिक्र किया गया है। इस पत्र में कहा गया है कि यह जमीन आईडीए के किसी योजना में नहीं है। इसी तरह एक रजिस्ट्री में 20 अक्टूबर 2005 के आईडीए के पत्र क्रमांक 6864 का जिक्र किया गया है, जिसमें उल्लेख है कि यह जमीन आईडीए के किसी स्कीम में नहीं है।

आईडीए ने लिखित में माना-इन पत्रों का कोई रिकॉर्ड नहीं

जब आईडीए के अधिकारियों से उपरोक्त दोनों पत्रों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। जब सूचना के अधिकार के तहत आईडीए से योजना क्रमांक 53 में सम्मिलित खसरा क्रमांक 28 के संबंध में जारी की गई अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति चाही गई है, तो उसके हाथ-पांव फूल गए। इसके जवाब में कहा गया कि प्राधिकारी की भू-अर्जन शाखा, रूपाकंन शाखा एवं स्थापना शाखा द्वारा चाही गई जानकारी उपलब्ध नहीं होने के संबंध में टीप प्रेषित की गई। प्रकरण में मुख्य कार्यपालिक अधिकारी महोदय द्वारा संज्ञान लेते हुए संबंधित शाखा प्रभारियों को उनकी शाखाओं एवं रेकार्ड रूम में प्रकरण से संबंधित नस्ती खोजने हेतु निर्देशित किया गया। इस कम में सहायक भू-अर्जन अधिकारी, संबंधित लिपिक, पटवारी एवं काम्पेक्टर रूम प्रभारी द्वारा वांछित नस्ती को ढूढने के प्रयास किये गये, किन्तु आपके द्वारा वांछित योजना कमांक 53 में सम्मिलित खसरा क्रमांक 28 से संबंधित अनापत्ति पत्र उपलब्ध नहीं हुआ है।

क्या रजिस्ट्री में दी गई गलत जानकारी?

इसका मतलब साफ है कि तृष्णा गृह निर्माण संस्था की जमीन की रजिस्ट्री कराते समय जो जानकारी दी गई वह पूरी तरह से फर्जी है। या फिर मॉल माफिया छाबड़ा ने आईडीए से ऐसा पत्र जारी करवा कर उसे रिकॉर्ड से गायब करा दिया। ताज्जुब इस बात का भी है कि रजिस्ट्री में पत्र क्रमांक लिखते हुए पर्सनल शब्द भी लिखा है। आईडीए कोई पर्सनल पत्र कैसे जारी कर सकता है और उसके आधार पर आंख मूंदकर रजिस्ट्री भी कैसे हो सकती है। इस पत्र को तो विभाग की एनओसी मानकर ही तो रजिस्ट्री की गई है, तब आईडीए में इसका कोई रिकॉर्ड क्यों नहीं?

कोई दूसरा होता तो केस कर चुका होता विभाग

इस पूरे फर्जीवाड़े में इंदौर विकास प्राधिकरण सहित तमाम विभाग भी जांच के घेरे में हैं। अब जबकि आईडीए के पास यह जानकारी है कि रजिस्ट्री में या तो फर्जी एनओसी का इस्तेमाल किया गया है या फिर उनके रिकॉर्ड से पत्र गायब करवाया गया है, तो भी किसी पर कार्रवाई नहीं हो रही। अगर पिंटू छाबड़ा की जगह कोई और होता तो आईडीए कब का उस पर धोखाधड़ी का केस कर चुका होता।

स्कीम 53 के खसरे पर बना है बिजनेस पार्क

जिस 28/2 खसरे पर यह बिजनेस पार्क बना है, वह आईडीए की स्कीम 53 का हिस्सा है। इस स्कीम को छोड़ने की अनुमति आईडीए ने अभी तक शासन से नहीं ली है। शासन के पास डिनोटिफिकेशन की कोई फाइल भी नहीं भेजी गई। आईडीए के पास अपने स्तर पर कोई स्कीम छोड़ने का अधिकार भी नहीं है, ऐसे में स्कीम की जमीन पर अनुमति मिलना जांच का विषय है।

कमर्शियल निर्माण की परमिशन पर भी उठ रहे सवाल

सी-21 मॉल बिजनेस पार्क की जमीन कृषि भूमि थी, जिसे तृष्णा गृह निर्माण संस्था से खरीदा गया। उस समय टीएनसीपी में तृष्णा और कनकेश्वरी गृह निर्माण संस्था ने आपत्ति भी ली थी, इसके बाद भी कृषि भूमि पर कमर्शियल नक्शा पास कर दिया गया। जब कि आज भी 94 पार्ट-2 और आसपास कहीं भी कमर्शियल परमिशन नहीं दी जा रही है। यह भी जांच का विषय है। रजिस्ट्री में भी मेंशन है कि संस्था की जमीन है। इसमें भी कुछ अधिकारियों की संलिप्तता आ रही है। इसको लेकर आगे लोकायुक्त में शिकायत भी होगी।

न्याय नगर के आरोपी ने बेची जमीन

रजिस्ट्री की सेल डीड पर उसी राजेश सिद्ध के हस्ताक्षर हैं, जो न्याय नगर के मामले में भारी फर्जीवाड़ा कर चुका है। इस मामले में उस पर कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन तृष्णा गृह निर्माण संस्था के मामले में उसे सिर्फ इसलि बख्श दिया गया क्योंकि यह सौदा पिंटू छाबड़ा का था।

खेल में भूमाफिया, लाइनजर और एक मंत्री का संरक्षण

सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल में इंदौर का एक बड़ा लाइनजर और एक कुख्यात भूमाफिया भी शामिल है। इसके साथ ही पिंटू छाबड़ा को एक मंत्री का खुला संरक्षण प्राप्त है। इसी कारण सारे विभाग चुप बैठे हुए हैं और फर्जी तरीके से खरीदी गई जमीन पर पिंटू छाबड़ा ने सी-21 बिजनेस पार्क खड़ा कर रखा है। यहां यह भी जिक्र करना जरूरी है कि यह वही पिंटू छाबड़ा हैं जिन्होंने एबी रोड पर चाय व्यापारियों के कई प्लॉटों को जोड़कर सी-21 मॉल खड़ा कर रखा है और सारे विभागों ने मुंह पर ताला लगा लिया। ताज्जुब तो तब होता है जब पिंटू छाबड़ा इस जमीन को फ्री होल्ड कराने की कोशिश में लगा है और आईडीए के अधिकारी उसके साथ मीटिंग भी कर रहे हैं। वह दिन दूर नहीं जब आपको सुनने को मिले की आईडीए ने इस जमीन को फ्री होल्ड कर दिया है।

फिर बाकी भू-माफियाओं पर कार्रवाई क्यों?

यहां सवाल यह उठता है कि जब पिंटू छाबड़ा के लिए सारे नियमों को ताक पर रख दिया जाता है तो बाकी के भू-माफियाओं पर कार्रवाई क्यों? प्रदेश सरकार ने आईडीए की स्कीम नंबर 171 और 94 पार्ट 2 के मामले में कई भू-माफियाओं को पकड़ कर वाहवाही लूटी थी, जबकि उनके केस भी पिंटू छाबड़ा जैसे ही थे। इस प्रकरण से ऐसा लगता है कि भूमाफियाओं को अब किसी विभाग से अनुमति लेने की जरूरत ही नहीं। सिर्फ सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन का उदाहरण दिखाकर वे अपना काम करा सकते हैं। इस मामले के लगातार खुलासे के बाद अब कई लोग लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में इसकी शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।

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