बिना ऑडिट कराए ही देवी अहिल्या संस्था की सूची फाइनल करने में जुटा सहकारिता विभाग, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुआ ऑडिट

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इंदौर। सहकारिता विभाग इन दिनों देवी अहिल्या संस्था की अयोध्यापुरी और महालक्ष्मी नगर की वरीयता सूची फाइनल कराने की कोशिश में जुटा हुआ है। इसके लिए कलेक्टर आशीष सिंह भी दो बार बैठक ले चुके हैं। इन बैठकों में हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी के प्रतिवेदनों की बात तो होती है, लेकिन कभी ऑडिट का जिक्र नहीं किया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कई वर्षों से देवी अहिल्या संस्था का ऑडिट नहीं हुआ है।

हाईकोर्ट ने 2012 में दिए थे आदेश

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने रिट याचिका क्रमांक 5503/12 में 11 जून 2012 को पारित अपने आदेश में 45 दिन के अंदर देवी अहिल्या संस्था के स्पेशल ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद 2005-06 के बाद इस संस्था का नियमित ऑडिट भी नहीं कराया गया। इस संबंध में संयुक्त आयुक्त सहकारिता, इंदौर संभाग द्वारा 5 मार्च 2018 को उपायुक्त सहकारिता को लिखे पत्र में भी इसका हवाला दिया गया था। इसमें स्पष्ट लिखा था कि 2009 से संचालक मंडल भंग होने के बाद लगातार 9 वर्ष संस्था का ऑडिट नहीं हुआ है। यह तब हुआ जब संस्था में प्रशासक तैनात था। 2021-25 तक विमल अजमेरा अध्यक्ष रहे, फिर भी संस्था का ऑडिट नहीं हुआ। विभागीय पत्र व्यवहार चलता रहा, लेकिन ऑडिट नहीं हुआ। अब तो इस संबंध में कोई पत्र व्यवहार भी नहीं हो रहा है।

कलेक्टर से छुपाई जा रही यह बात

अब जबकि सहकारिता विभाग खुद ही वरीयता सूची फाइनल कराने में जुटा है। हाईकोर्ट के निर्देश पर कलेक्टर द्वारा गठित समिति अपना प्रतिवेदन और सदस्यों की सूची सौंप चुकी है। उसके आधार पर संस्था द्वारा वरीयता सूची फाइनल की जा रही है, कलेक्टर से ऑडिट वाला तथ्य छुपाया जा रहा है। न तो सहकारिता विभाग और न ही संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा ऑडिट की बात सामने आने देना चाहते हैं।

बिना ऑडिट सूची का होगा क्या

सूत्र बताते हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद वरीयता सूची फाइनल तो कराई जा रही है, लेकिन ऑडिट की बात छुपा कर इसमें पेंच फंसाने की कोशिश भी हो रही है। ऐसे में अगर कलेक्टर की सख्ती के बाद सूची फाइनल भी हो जाती है तो ऑडिट के नाम पर इसे अटकाया जा सकता है।

दो बार मिल चुका है अल्टीमेटम

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर द्वारा गठित समिति ने विमल अजमेरा को पात्र सदस्यों की सूची पिछले साल ही भेज दी थी। अजमेरा और उनके संचालक मंडल को इसे वेरिफाई कर विभाग में भेजना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद सहकारिता विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा, लेकिन अजमेरा अपने खास लोगों के प्लॉट की रजिस्ट्री कराने की सिफारिश करते रहे। इसके बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने 22 जून को एक बैठक बुलाकर अजमेरा को जमकर फटकार लगाते हुए 15 दिन में सूची वेरिफाई कर नहीं भेजने पर एफआईआर की चेतावनी दी थी। इसके बाद 12 जुलाई को रेसीडेंसी कोठी में फिर बैठक बुलाई गई और 15 जुलाई तक वरीयता सूची फाइनल करने के निर्देश दिए गए थे।

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