आखिर एक मामूली आरटीओ सिपाही कैसे बना करोड़पति, प्रदेश में लंबे समय से भाजपा सरकार, फिर कौन दे रहा था संरक्षण

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भोपाल। इन दिनों पूरे देश में भोपाल आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की चर्चा है। सौरभ के पास से मिली अकूत संपत्ति से यह साफ जाहिर है कि बिना किसी राजनीतिक सपोर्ट के वह इतना कुछ नहीं कर पाया होगा। कई नामों के खुलासे हो रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर नामजद आरोप लगाए हैं। भले ही उनके आरोपों को विपक्ष का मान कर कचरे के डिब्बे में डाल दिया जाए, लेकिन यह सवाल तो फिर भी खड़ा रहेगा कि बिना किसी सरकारी सपोर्ट के एक आरक्षक यहां तक कैसे पहुंचा?

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी थी। उस चिट्ठी में उन्होंने सौरभ शर्मा के हिस्सेदारों के नाम बताए हैं। दिग्विजय सिंह ने इस मामले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी लपेटे में लिया है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ की सरकार के दौरान उनका भारी दबाव था कि गोविंद सिंह राजपूत को परिवहन मंत्रालय मिले। दिग्विजय सिंह ने कहा कि सौरभ शर्मा को सागर निवासी पूर्व परिवहन मंत्री का सीधा संरक्षण प्राप्त था। सौरभ शर्मा पूर्व परिवहन मंत्री के परिवार के सदस्य की तरह बंगले पर बैठता था, जहां वकील साहब के नाम से मशहूर संजय श्रीवास्तव के साथ बैठकर पूरे प्रदेश में परिवहन विभाग के करोड़ों रुपए के लेनदेन का हिसाब किताब रखता था। दिग्विजय सिंह के इस पत्र और बयान के बाद वकील संजय श्रीवास्तव ने शनिवार को उन्हें 10 करोड़ की मानहानि का नोटिस जारी किया है।

भाजपा विधायक ने कांग्रेस के पूर्व एमएल पर उठाए सवाल

पिछोर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने आरोप लगाया कि सौरभ शर्मा के यहां पर छापे में जो अवैध संपत्ति मिली है, वह पिछोर के पूर्व कांग्रेस विधायक की है। विधायक लोधी ने इस मामले में जांच एजेंसियों से मांग की है कि इस मामले में गहराई से जांच हो कि सौरभ की नियुक्ति परिवहन विभाग में किसने करवाई। लोधी ने आरोप लगाया कि सौरभ का डीएनए टेस्ट होना चाहिए। कांग्रेस के पूर्व विधायक के सौरभ शर्मा की मां से क्या संबंध रहे। इसकी जांच हो।

करीबियों ने ही लोकायुक्त तक पहुंचाया मामला

बताया जा रहा है कि उसकी काली कमाई के खजाने की जानकारी लोकायुक्त को उसके करीबियों ने ही दी थी। जानकारी के अनुसार सौरभ का उसके करीबियों से कारोबार को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद सौरभ कारोबार में उसके करीबियों की अनदेखी करने लगा था। इससे उसके साथ काम करने वालों के नफरत पैदा हो गई। फिर उन्होंने बदला लेने के लिए सौरभ की शिकायत लोकायुक्त से कर दी। यहीं नहीं उन्होंने ही ईडी को भी मेंडोरी गांव में इनोवा कार 52 किलो सोना और करीब 11 करोड़ रुपए रखे होने की सूचना दी।

700 करोड़ की संपत्ति का अंदाजा

सौरभ के पास 700 करोड़ की संपत्ति का अंदाजा लगाया जा रहा है। दुबई में उसका 150 करोड़ रुपए का घर होने की बात भी सामने रही है। सौरभ ने दोस्तों और रिश्तेदारों को अलगअलग बिजनेस सौंप रखे हैं। होटल का संचालन रोहित और शरद करते थे। इसी प्रकार भोपाल के चूनाभट्टी चौराहे पर फगीटो नाम से रेस्टोरेंट का संचालन भी यही दोनों संभाला करते थे। छापों के बाद सौरभ के अधिकांश दोस्त घर और नौकरी से गायब हैं। इसी प्रकार ग्वालियर में रहने वाले उसके रिश्तेदार भी अंडरग्राउंड हो चुके हैं। सौरभ ने पत्नी के नाम से भी काफी संपत्ति ले रखी है।

भाजपा सरकार में कौन दे रहा था संरक्षण

इस मामले में सरकार की चुप्पी भी काफी कुछ कह रही है। हालांकि अब धुआं उठने लगा है और बात दिल्ली तक पहुंच चुकी है। सरकार और भाजपा भले ही कांग्रेस के आरोपों को दरकिनार कर दें, लेकिन लोग तो यही कह रहे कि जब प्रदेश में 2003 से सिर्फ 13 दिसम्बर 2018 से 20 मार्च 2020 तक के कमलनाथ के कार्यकाल को छोड़कर लगातार भाजपा की ही सरकार रही है, तो सौरभ शर्मा कांग्रेस के समर्थन से तो भ्रष्टाचार करने से रहा। ताज्जुब की बात यह है कि सौरभ को इतना बड़ा किसने बनाया कि पूरा परिवहन विभाग उसी के इशारे पर चलने लगा। ट्रांसफर से लेकर परिवहन चौकियों पर नियुक्ति तक भी वही कराता था। ऐसे में इस मामले की गंभीरता से जांच कर पूरे नेटवर्क का सफाया करने की जरूरत है।

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