गांधी नगर संस्था में सहकारिता विभाग का फर्जीवाड़ा, तत्कालीन उपायुक्त गजभिये और उप अंकेक्षक आशीष सेठिया ने पांच साल टाली कार्रवाई

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इंदौर। यह विडंबना है कि आम जनता की रखवाली के लिए बैठे सहकारिता विभाग ने गांधी नगर गृह निर्माण संस्था में जमकर फर्जीवाड़ा किया। वर्ष 2020 में कार्रवाई के निर्देश के बाद भी तत्कालीन सहकारिता उपायुक्त मदन गजभिये, उप अंकेक्षक आशीष सेठिया ने पांच साल तक कार्रवाई टाली। लोकायुक्त में शिकायत के बाद अब संयुक्त आयुक्त सहकारिता इंदौर संभाग बी.एल. मकवाना ने आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मध्यप्रदेश को गजभिये, सेठिया और गांधी नगर संस्था के प्रबंधक फूलचंद पांडेय पर कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा है।

परिहार की जांच में कई खुलासे

सहकारिता विभाग के तत्कालीन अंकेक्षण अधिकारी जीएस परिहार ने गांधी नगर संस्था के मामले में धारा 59 का प्रतिवेदन 08 दिसंबर 2020 को उपायुक्त, सहकारिता को प्रस्तुत किया था। इसमें कई गंभीर अनियमितताएं मिली थीं। इसमें यह भी कहा गया था कि संस्था का वर्तमान संचालक एवं प्रबंधक .प्र. सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 एवं संस्था की पंजीकृत उपविधियों के निर्देशों का पालन करने के लिए रजामंद नहीं है। पूर्व और वर्तमान संचालक मंडल ने अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया है। इसके कारण संस्था में अनियमितताएं हैं, जिनका उचित निराकरण नहीं किया जा रहा है।

गजभिये और सेठिया ने कार्रवाई को टाला

परिहार के प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि तत्कालीन उपायुक्त सहकारिता एमएल गजभिये, उप अंकेक्षक आशीष सेठिया, तत्कालीन प्रशासक सहकारी निरीक्षक प्रवीण जैन (वर्तमान में सेवानिवृत्त), संस्था प्रबंधक फूलचंद पाण्डेय ने जानबूझकर कार्रवाई को टाला। इसलिए ये सभी दोषी हैं। उपायुक्त को कार्रवाई के लिए पत्र क्र. गृह/2024/1340 दिनांक 07.08.2024, पत्र क्र. गृह/2024/1642 दिनांक 14.10.2024, पत्र क्र. गृह/2024/1688 दिनांक 21.10.2024, पत्र क्र. गृह/2025/453 दिनांक 03.04.2025 एवं पत्र क्रमांक गृह/2025/667 दिनांक 20.05.2025 भेजा गया, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।

देरी के लिए गजभिये, सेठिया और पांडेय जिम्मेदार

जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि कार्यवाही में विलंब के कारणों की जांच की जाए। इस काम के लिए उत्तरदायित्व का निर्धारण कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 13 जनवरी 2025 को एक प्रतिवेदन में एम.एल. गजभिये, तत्कालीन उपायुक्त, सहकारिता, जिला इन्दौर, आशीष सेठिया, उप अंकेक्षक, इन्दौर एवं संस्था प्रबंधक फूलचंद पाण्डेय के उत्तरदायित्व के संबंध में तथ्य अंकित किए गए हैं। इसके साथ ही 07.08.2024, 14.10. 2024, 21.10.2024, 03.04.2025, 20.05.2025 को भेजे पत्र के माध्यम से कार्रवाई के निर्देश देने के बाद भी तत्कालीन उपायुक्त, सहकारिता, जिला इन्दौर द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। प्रकरण में उत्तरदायी संस्था पदाधिकारियों संचालकों एवं संस्था कर्मचारियों के साथ विभागीय प्रशासक, परीक्षण अधिकारी के विरूद्ध भी कोई कार्यवाही नहीं करना दायित्व निर्वहन में चूक है। इसके लिए तत्कालीन उपायुक्त, सहकारिता एम.एल. गजभिये उत्तरदायी हैं।

सेठिया ने भाइयों को दिला दिए प्लॉट

प्रतिवेदन के अनुसार संस्था के अभिलेख थाने में वर्ष 2013 से जमा हो गए थे। इसके बाद भी आशीष सेठिया, उप अंकेक्षक के दोनों भाइयों को भूखंड की रसीदें जारी की गईं। इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई और नई रसीद बुक खरीद कर सेठिया के भाइयों को रसीदें जारी कर दी गईं। चूंकि आशीष सेठिया, कार्यालय उपायुक्त, सहकारिता, जिला इन्दौर में पदस्थ होकर प्रकरण में तामिली प्रतिवेदन के परीक्षणकर्ता भी रहे हैं, अतः उक्त कार्य को पद के दुरूपयोग की श्रेणी के अंतर्गत माना जा सकता है।

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