यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर बवाल, दिनभर चला विरोध और बैठकों का सिलसिला, सीएम ने कहा-जनता की शंकाओं को दूर करेंगे

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यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर बवाल, दिनभर चला विरोध और बैठकों का सिलसिला, सीएम ने कहा-जनता की शंकाओं को दूर करेंगे
यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर बवाल, दिनभर चला विरोध और बैठकों का सिलसिला, सीएम ने कहा-जनता की शंकाओं को दूर करेंगे

इंदौर। यूनियन कार्बाइड के कचरे को पीथमपुर में जलाने को लेकर गुरुवार को दिनभर गहमागहमी रही। पीथमपुर से लेकर दिल्ली तक विरोध के बीच इंदौर में इसी मुद्दे पर बैठक हुई, जिसमें लोगों ने अपनी राय रखी। इस बीच सीएम डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि जनता की शंकाओं को दूर कर सावधानीपूर्वक कचरे का निष्पादन किया जाएगा।

सीएम यादव ने कहा कि जनता के सरोकार प्राथमिकता में सबसे ऊपर है, कचरे के विनिष्टीकरण की कार्रवाई सतत् निगरानी में की जाएगी। हादसे के 40 वर्ष बीतने के बाद भोपाल में रखा लगभग 337 मीट्रिक टन कचरे का हानिकारक प्रभाव खत्म हो गया है। उन्होंने बताया कि बचे हुए शेष कचरे में 60 प्रतिशत से अधिक केवल स्थानीय मिट्टी, 40 प्रतिशत में 7-नेपथॉल, रिएक्टर रेसिड्यूज और सेमी प्रोसेस्ड पेस्टीसाइड्स का अपशिष्ट है। इसमें मौजूद 7-नेपथॉल रेसीड्यूस मूलतः मिथाइल आइसो साइनेट एवं कीटनाशकों के बनने की प्रक्रिया का सह-उत्पाद होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका विषैला प्रभाव 25 साल में लगभग समाप्त हो जाता है।

सीएम ने बताई फैसले से पहले की प्रक्रिया

गुरुवार को सीएम यादव ने भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि कचरे के निपटान की प्रक्रिया का केन्द्र सरकार की विभिन्न संस्थाओं तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा समय-समय पर गहन परीक्षण किया गया है। उनके अध्ययन तथा सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत प्रतिवेदनों के आधार पर भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को मार्च, 2013 में दिए गए निर्देशानुसार केरल कोच्चि स्थित हिंदुस्तान इनसेक्टीसाइड लिमिटेड के 10 टन यूनियन कार्बाइड के समान कचरे का परिवहन कर पीथमपुर स्थित टीएसडीएफ में ट्रायल रन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में किया गया। सफल ट्रायल रन का प्रतिवेदन सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। ट्रायल रन के निष्कर्षों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने अप्रैल, 2014 में यूसीआईएल के 10 मीट्रिक टन कचरे का एक और ट्रायल रन भारत सरकार, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली की निगरानी में टीएसडीएफ पीथमपुर मे किए जाने के निर्देश दिए।

इंदौर की बैठक में लोगों ने रखे अपने सुझाव

पीथमपुर में इसका जबरदस्त हो रहा है। इस मुद्दे पर धार के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आज एआईसीटीएसएल सभागार में बैठक की। उन्होंने बैठक में शामिल लोगों से कहा कि आप लोगों की संतुष्टि के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। बैठक में मंत्री सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, कलेक्टर आशीष सिंह संभागायुक्त दीपक सिंह समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद हैं। बैठक में शामिल आईएएस विवेक पोरवाल ने बताया कि अभी जो कचरा है उसमें 60 परसेंट सिर्फ मिट्टी है। कचरे के केमिकल कंपोजिशन में नेपथॉल-7 है। नेपथॉल-7 के बारे में वैज्ञानिक तर्क ये कहता है कि 25 साल में उसके सारे जहरीले प्रभाव अपने आप समाप्त हो जाते हैं। भारत में इस कचरे को लेकर जितना अध्ययन हुआ है, उतना दुनिया भर में कहीं नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने 12, केंद्र सरकार ने 13 कमिटियां कचरे के निपटान के लिए बनाई। आईआईटी जैसे कई संस्थानों ने कचरे पर रिसर्च किया। बैठक में इंदौर के सिटी इंजीनियर अतुल सेठ ने कचरे के निपटान पर सवाल उठाए।

कचरा जलाने में लगेंगे तीन से छह माह

संचालक गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की मॉनिटरिंग में पूरी प्रोसेस चल रही है। करीब 337 टन कचरे को जलाने में करीब 3 से 6 महीने तक लग सकते हैं।

विरोध में कल पीथमपुर में बंद

पीथमपुर में लोगों और विभिन्न संगठनों ने कचरा यहां जलाए जाने के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। करीब 40 युवा तो अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। इधर, पीथमपुर बचाओ समिति ने दिल्ली के जंतरमंतर पर प्रदर्शन किया। 3 जनवरी को पीथमपुर बंद का ऐलान किया गया है। स्थानीय नेताओं बंद के समर्थन के लिए घरघर जाकर लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है।

सुमित्रा महाजन से मिले जीतू पटवारी

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मुलाकात की। उन्होंने पीथमपुर में प्रस्तावित यूनियन कार्बाइड कचरे के निस्तारण के मुद्दे पर उनसे बात की। पटवारी ने सुमित्रा महाजन से कहा कि यह मामला इंदौर और क्षेत्र के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। प्रदेश के हित में इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

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