आतंकवाद के खिलाफ जम्मू-कश्मीर विधानसभा का ऐतिहासिक प्रस्ताव

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आतंकवाद के खिलाफ जम्मू-कश्मीर विधानसभा का ऐतिहासिक प्रस्ताव
आतंकवाद के खिलाफ जम्मू-कश्मीर विधानसभा का ऐतिहासिक प्रस्ताव

आतंकवाद के खिलाफ जम्मू-कश्मीर विधानसभा का ऐतिहासिक प्रस्ताव

पहलगाम हमले के बाद एकजुट हुआ पूरा सदन, आतंकवाद को नहीं देने का संकल्प

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के विशेष सत्र में पहली बार आतंकवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया। इस प्रस्ताव के ज़रिए पूरी दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि आतंकवाद के लिए अब कोई जगह नहीं है।

Won't talk statehood at this time, I've lost face: Omar Abdullah on J&K  attack​​

शहीदों को श्रद्धांजलि, आदिल हुसैन शाह की बहादुरी को सलाम

सत्र के दौरान पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और हमले में जान गंवाने वाले 26 पर्यटकों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। पर्यटकों की जान बचाते हुए शहीद हुए आदिल हुसैन शाह की वीरता को भी याद किया गया।

प्रस्ताव का व्यापक संदेश: शांति, एकता और संवैधानिक मूल्यों की पुकार

उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए इसे बर्बर और अमानवीय हमला बताया, जिससे गहरा दुख और सदमा पहुंचा है। प्रस्ताव में सभी राजनीतिक, धार्मिक और सामुदायिक संगठनों से शांति, एकता और संवैधानिक मूल्यों को कायम रखने की अपील की गई।

प्रस्ताव में कहा गया:यह हमला कश्मीरियत, संविधान में निहित मूल्यों, एकता, और शांति-सद्भाव पर सीधा आघात है, जो जम्मू-कश्मीर और भारत की विशेषता रहे हैं।”

विपक्ष और सत्ता एक मंच पर, केंद्र के फैसलों का समर्थन

सत्ता और विपक्ष ने इस प्रस्ताव पर एकमत होकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई। सदन ने केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा को लेकर लिए गए कूटनीतिक फैसलों का समर्थन किया। साथ ही सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई।

उमर अब्दुल्ला की भावुक अपील: यह वक्त राजनीति का नहीं, एकजुटता का है

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विशेष सत्र में कहा:मैं 26 लाशों पर सियासत नहीं करूंगा। मेरी राजनीति इतनी सस्ती नहीं है। यह वक्त एकजुट होकर आतंकवाद की निंदा और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करने का है।”

उन्होंने आगे कहा कि राज्य की जनता का गुस्सा यह संकेत है कि आतंकवाद का अंत अब दूर नहीं। बंदूक से आतंकवाद नहीं मिटता, यह तभी खत्म होगा जब जनता साथ आएगी — और अब लगने लगा है कि लोग जुड़ रहे हैं।”

मुख्यमंत्री की आत्मग्लानि: मेरे पास माफी के लिए शब्द नहीं हैं

पर्यटन मंत्री के रूप में उमर अब्दुल्ला ने खुद को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, मैंने पर्यटकों को बुलाया था, अब उनके परिवारों से माफी किस शब्द में मांगूं? यह मेरी जिम्मेदारी थी, जो मैं निभा नहीं पाया।”

उन्होंने बच्चों, विधवाओं और पीड़ित परिवारों के दर्द को साझा करते हुए कहा कि यह केवल एक हमला नहीं, बल्कि 21 साल बाद कश्मीरियत और देश की एकता पर सीधा हमला है।

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