सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर जेल अधीक्षक से मांगा जवाब

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नई दिल्ली। लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की याचिका में एनएसए के तहत उनकी हिरासत को अवैध बताया गया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर जेल अधीक्षक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

गीतांजलि अंगमो की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें डिटेंशन ऑर्डर की कॉपी नहीं दी गई। इसका जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक को सारी जानकारी दी गई है। जोधपुर जेल में उनके भाई से उनकी मुलाकात भी करवाई गई है। इस पर सिब्बल ने कहा कि वांगचुक की अपने भाई और वकील से बात सिर्फ इंटरकॉम पर करवाई गई। सिब्बल ने कहा कि कानून के अनुसार हिरासत में लिए गए व्यक्ति के परिवार को हिरासत के आधार लिखित रूप में बताए जाने चाहिए। तभी वह उसे कानूनी चुनौती दे सकते हैं। सिब्बल ने कोर्ट से आग्रह किया कि हिरासत से जुड़े दस्तावेज वांगचुक की पत्नी को भी दिए जाएं।

कोर्ट ने कहा कि सरकार याचिकाकर्ता को हिरासत आदेश की कॉपी उपलब्ध करवाने पर विचार करे। इस पर मेहता ने कहा कि कानून के तहत इसे बंदी को दिया जा चुका है। हम पत्नी को भी इसकी कॉपी देने पर विचार करेंगे। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कोर्ट को यह भी बताया कि याचिकाकर्ता ने जेल में उनसे मुलाकात का आवेदन दिया है। उनके अनुरोध पर विचार किया जा रहा है। इस पर जस्टिस कुमार ने कहा कि जोधपुर जेल प्रशासन जेल नियमों के अनुसार इस पर फैसला ले।मेहता ने याचिका में लिखी इस बात पर सवाल उठाया कि सोनम वांगचुक को आवश्यक दवाइयों से वंचित रखा गया है। मेहता ने कहा कि उन्होंने खुद मेडिकल ऑफिसर के सामने कहा है कि वह किसी दवा पर नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि कैदी को जेल नियमों के अनुसार जरूरी मेडिकल सुविधा दी जाए।

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