कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन अस्तव्यस्त, हजारों लोग सुरक्षित निकाले गए
जम्मू संभाग के बाद अब कश्मीर में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में वीरवार को मौसम साफ हुआ, लेकिन तबाही का डर अब भी लोगों को परेशान कर रहा है।

बांध टूटने से खतरा बढ़ा
पांपोर और टेंगन बाईपास पर बांध टूटने, वहीं बडगाम जिले के जूनीपोरा के पास झेलम नदी के तटबंध में दरार आने से कई गांव जलमग्न हो गए। पुलवामा जिले के संबूरा में बांध टूटने से नौगाम क्षेत्र के लिए बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।
प्रशासन के मुताबिक झेलम तटबंध टूटने के बाद एहतियातन बडगाम से करीब 9,000 लोगों को निकाला गया है। फिलहाल जलस्तर घटने से स्थिति नियंत्रण में है। बडगाम के कुछ गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। जिला प्रशासन ने छह बचाव केंद्र सक्रिय किए हैं। कई इलाकों में बिजली-पानी की सेवाएं भी प्रभावित हैं।
भूस्खलन से हालात बिगड़े
किश्तवाड़ जिले में पनबिजली परियोजना का अस्थायी शेड भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिसमें पांच लोग दब गए थे। सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया है । उधमपुर के चिनैनी इलाके में भूस्खलन से एक हाई स्कूल और एक मकान बह गया।
श्री माता वैष्णो देवी यात्रा भी 26 अगस्त से भूस्खलन के कारण बंद है। जम्मू और कटड़ा से नियमित ट्रेनों का संचालन प्रभावित है। कटरा शटल ट्रेन सेवा भी दूसरे दिन स्थगित रही।
सीमा पर भी असर
जम्मू और पंजाब के अग्रिम इलाकों में बाढ़ से भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) की 110 किलोमीटर से अधिक बाड़ क्षतिग्रस्त हो गई है। वहीं, बीएसएफ की करीब 90 चौकियां पानी में डूब गई हैं।
यातायात पूरी तरह ठप
उधमपुर के थर्ड इलाके में पहाड़ धंसने की वजह से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग तीसरे दिन भी बंद रहा। इसके चलते घाटी सहित चिनाब वैली से लगते जिलों में यातायात पूरी तरह ठप है। हालांकि, हाईवे की मरम्मत का काम तेजी से जारी है।




