नई दिल्ली। बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर बवाल मचा हुआ है। सारे विपक्षी दल जहां इसका विरोध कर रहे हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं भी लगी हैं। घर–घर जाकर किए गए सर्वे के दौरान बूथ लेवल ऑफिसरों को बड़ी संख्या में ऐसे लोग मिले हैं, जो नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से अवैध रूप से भारत आए हैं और वोटर लिस्ट में नाम नाम जुड़वाने की कोशिश कर रहे थे।
चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि इन संदिग्ध नामों की जांच की जा रही है। 1 अगस्त 2025 के बाद जो नाम सत्यापित नहीं होंगे, उन्हें 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया जाएगा। अंतिम लिस्ट के प्रकाशन के बाद आयोग इन अवैध प्रवासियों की संख्या को सार्वजनिक कर सकता है। आयोग के अनुसार, अब तक 80 प्रतिशत से अधिक पात्र मतदाता अपने फॉर्म जमा कर चुके हैं। हालांकि, आयोग ने इस प्रक्रिया की अंतिम तिथि 25 जुलाई निर्धारित की है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि उससे पहले ही यह कार्य पूर्ण हो जाएगा।
चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों के 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और 963 सहायक ईआरओ (एईआरओ) सहित क्षेत्र स्तरीय टीमों की निर्वाचन अधिकारी की ओर से बारीकी से निगरानी की जा रही है। चुनाव आयोग के इन प्रयासों के साथ ही सभी राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त 1.5 लाख बीएलए भी घर–घर जाकर हर मौजूदा मतदाता को शामिल कर रहे हैं।


