वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत बना दक्षिण एशिया का आर्थिक इंजन: WEF की रिपोर्ट

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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत बना दक्षिण एशिया का आर्थिक इंजन: WEF की रिपोर्ट

विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट ‘मुख्य अर्थशास्त्री आउटलुक’ में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक राष्ट्रवाद और टैरिफ अस्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक माहौल में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक आर्थिक सुधार और विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

वैश्विक मंदी का बढ़ता जोखिम

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की वर्तमान आर्थिक नीतियों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्थायी असर देखने को मिल रहा है। इससे न केवल वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ रहा है, बल्कि कई देशों में रणनीतिक व्यावसायिक निर्णयों में देरी भी हो रही है। यह वैश्विक आर्थिक दबाव का संकेत है, खासकर जब मौजूदा आर्थिक घटनाक्रम समग्र वृद्धि को धीमा कर रहे हैं।

दक्षिण एशिया में सकारात्मक संकेत

हालांकि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है, रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया आर्थिक विस्तार के मामले में सबसे अधिक आशावादी क्षेत्र बनकर उभरा है। इस क्षेत्र में भारत को 2025 और 2026 के दौरान विकास का मुख्य इंजन बनने की संभावना जताई गई है।

  • 86% प्रमुख अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दक्षिण एशिया में इस वर्ष कम से कम मध्यम स्तर की आर्थिक वृद्धि होगी।
  • 73% विशेषज्ञ पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए भी ऐसा ही अनुमान रखते हैं।
  • इसके विपरीत, केवल 56% अमेरिका, 59% चीन, और मात्र 13% यूरोप के लिए आर्थिक विकास को लेकर आशावादी हैं।

भारत की मजबूत स्थिति

भारत, दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, वैश्विक अस्थिरताओं के बीच भी बेहतर स्थिति में बताया गया है।

  • आईएमएफ ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2025 के लिए 6.2% और 2026 के लिए 6.3% अनुमानित की है।
  • बेहतर घरेलू मांग, मजबूत निवेश, और डिजिटल नवाचार भारत को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आगे रखता है।
  • भारत और यूके के बीच व्यापार समझौते से भी आर्थिक संभावनाओं को नई गति मिली है।

क्षेत्रीय चुनौतियां और मुद्रास्फीति का खतरा

हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव के कारण दक्षिण एशिया की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस क्षेत्र में मध्यम से उच्च मुद्रास्फीति की संभावना है, जो दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए एक चुनौती बन सकती है।

निष्कर्ष

विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट इस ओर संकेत करती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक नाजुक और असमान सुधार के दौर से गुजर रही है। लेकिन दक्षिण एशिया, विशेष रूप से भारत, स्थिर विकास और आर्थिक नेतृत्व के संकेत दे रहा है। भारत की रणनीतिक स्थिति, घरेलू मजबूती और वैश्विक साझेदारियों के चलते उसे आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख चालक माना जा रहा है।

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