इस बार श्राद्ध पक्ष में कई दुर्लभ संयोग, शुरुआत चंद्र ग्रहण से और समापन सूर्य ग्रहण से होगा

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इस बार श्राद्ध पक्ष में कई दुर्लभ संयोग, शुरुआत चंद्र ग्रहण से और समापन सूर्य ग्रहण से होगा
इस बार श्राद्ध पक्ष में कई दुर्लभ संयोग, शुरुआत चंद्र ग्रहण से और समापन सूर्य ग्रहण से होगा

इंदौर। इस साल वर्षों बाद श्राद्ध पक्ष पर कई अनूठे संयोग देखने को मिल रहे हैं। श्राद्ध पक्ष की शुरुआत जहां चंद्रग्रहण से हो रही है, वहीं इसका समापन सूर्य ग्रहण से हो रहा है। आज रविवार 7 दिसंबर को खग्रास चंद्र ग्रहण लग रहा है। आज भाद्रपद की पूर्णिमा होने से पूर्णिमा का श्राद्ध आज ही है। पितृ पक्ष का समापन 21 सितंबर को हो रहा है, इस दिन सर्वपितृ अवमास्या है और इसी दिन खग्रास सूर्य ग्रहण भी है।

ज्योतिषियों के अनुसार 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर ग्रहण का सूतक लगेगा। पूर्णिमा का श्राद्ध सूतक लगने के पहले ही करना होगा। इस बार पितृपक्ष रविवार को कुंभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में आरंभ हो रहा है। इस दिन शततारका नक्षत्र सुकर्मा योग भी है। शततारका नक्षत्र कई तापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है, जो पितरों को श्रद्धा व्यक्त करने के लिए उपयुक्त समय है। इसके अलावा भी श्राद्ध पक्ष में कई संयोग बन रहे हैं।

इस बार 15 दिन का ही रहेगा श्राद्ध पक्ष

ज्योतिषियों के अनुसार इस बार महालय श्राद्ध पक्ष 16 की जगह 15 दिन का रहेगा। कुछ पंचांग में सप्तमी तथा कुछ पंचांग में नवमी तिथि का क्षय बताया गया है, इसको लेकर लोग भ्रमित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुतपकाल (10.45 से 12.20) में जिस तिथि की साक्षी हो उस दिन उस तिथि का श्राद्ध करना चाहिए। अगर कोई दुविधा हो तो ज्योतिषियों या पंडित से पूछ कर सकते हैं।

इस बार बुधादित्य योग का भी लाभ

इस बार श्राद्ध पक्ष के दौरान सिंह राशि में सूर्य, बुध केतु की युति भी बन रही है। इससे बुधादित्य योग बन रहा है। शास्त्रों में इस योग में तर्पण आदि करना लाभदायक होता है। कहा जाता है कि इस योग में श्राद्ध करने से पितृदोष भी खत्म हो जाते हैं। पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

गुरु पुष्य नक्षत्र के संयोग का भी लाभ

18 सितंबर को गुरु पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध करने के लिए यह योग सर्वश्रेष्ठ है। इस दिन पुष्य नक्षत्र सूर्योदय से अस्तकाल तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग की साक्षी भी रहेगी। इस दिन श्राद्ध करे से पितरों का विशेष आशीर्वाद मिलेगा।

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