फिल्म समीक्षा : मर्दानी 3 में रिपीट मोड में दिख रही हैं रानी मुखर्जी

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भारत वो देश है जहाँ अगर कोई कुत्ता गायब हो जाए तो लोग प्ले कार्ड्स लेकर मोमबत्ती जलाने मैदान में जाते हैं, लेकिन हजारों बच्चों के अपहरण की वारदातें उन्हें बेचैन नहीं करती। मर्दानी 3 में समाज के डार्क साइड (चाइल्ड ट्रैफिकिंग + बेगर माफिया) को बेबाकी से दिखाया गया है। सब कुछ इतना वीभत्स, घिनौना और बेहद संवेदनशील है कि दर्शक बेचैन हो जाता है।

मर्दानी 3 यश राज फिल्म्स की इस फ्रेंचाइजी का तीसरा हिस्सा है, जिसमें रानी मुखर्जी एक बार फिर अपनी आइकॉनिक भूमिका DCP शिवानी शिवाजी रॉय में लौटी हैं। निर्देशक अभिराज मीनावाला ने इस बार कहानी को और गहरा, डार्क और ब्रूटल बनाया है। फिल्म मानव तस्करी (human trafficking) के बेहद संवेदनशील और घिनौने पहलू को उठाती है, जहां भिखारीमाफिया और मेडिकल रिसर्च के नाम पर बच्चियों का शोषण होता है।

फिल्म की शुरुआत बुलंदशहर से होती है, जहां दो लड़कियां गायब हो जाती हैं। जांच के दौरान शिवानी को पता चलता है कि मुंबई में पिछले 90 दिनों में 93 बच्चियां बिना किसी ट्रेस के गायब हो चुकी हैं। ये केस एक खतरनाक नेटवर्क से जुड़ा है, जिसकी कमान संभाल रही है एक क्रूर और बेरहम महिला अम्मा (मल्लिका प्रसाद) — एक ऐसा किरदार जो भिखारी माफिया की मुखिया है और बच्चियों को ट्रैफिकिंग के लिए इस्तेमाल करती है।

शिवानी का ये केस सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि बहुत पर्सनल और इमोशनल हो जाता है। फिल्म रेस अगेंस्ट टाइम दिखाती हैकोई दया नहीं, कोई मर्सी नहीं। सेकंड हाफ में ट्विस्ट्स और कन्फ्रंटेशन आते हैं, लेकिन कई रिव्यूज में कहा गया है कि इंटरवल के बाद रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ जाती है और कुछ हिस्से प्रेडिक्टेबल लगते हैं।

फर्स्ट हाफ काफी इंटेंस, ग्रिपिंग और डिस्टर्बिंग हैजहां घिनौनी सच्चाई सामने आती है और रोंगटे खड़े कर देती है। शिवानी रॉय के रोल में रानी मुखर्जी फिर से कमाल कर गई हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, डायलॉग डिलीवरी, एक्शन और इमोशनल डेप्थ इतनी पावरफुल है कि कई क्रिटिक्स ने लिखा है — “रानी कई मेल स्टार्स को शर्मसार कर देती हैं वो फिल्म को अकेले कंधों पर उठाए हुए हैं। इस फिल्म की दूसरी ख़ास कि विलेन की भूमिका में मर्द नहीं, औरत ही है। मल्लिका प्रसाद (अम्मा) विलेन के रोल में सबसे ज्यादा चर्चा में है। उनका किरदार क्रूर और अनप्रेडिक्टेबल है। सपोर्टिंग कास्ट (जानकी बोदीवाला, जिष्णु सेंगुप्ता आदि) ठीकठाक हैं, लेकिन फोकस पूरी तरह रानी और मुख्य विलेन पर रहता है।

एक्शन सीक्वेंस रॉ और रियलिस्टिक हैं, सिनेमैटोग्राफी डार्क और ग्रिट्टी है, जो कहानी के मूड से मैच करती है। म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर इंटेंस मोमेंट्स को और प्रभावी बनाते हैं।

किसी भी सशक्त महिला को मर्दानी कहना अपन आप में कोई सम्मानजनक बात नहीं, लेकिन अगर आप एक्शन थ्रिलर के शौक़ीन हैं तो ही यह देखनीय है।

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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