नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव लागू हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने टोल वसूली प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला लागू कर दिया है, जिसके तहत अब टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार टोल भुगतान के लिए फास्टैग को प्राथमिक माध्यम बनाया गया है। जिन वाहनों में फास्टैग लगा और सक्रिय है, उनसे टोल अपने आप कट जाएगा। वहीं जिन वाहनों में फास्टैग नहीं है या सक्रिय नहीं है, उन्हें यूपीआई के जरिए भुगतान करना होगा, लेकिन इसके लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा।
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इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करना और ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करना है। डिजिटल भुगतान से पूरी प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।
नए नियमों के तहत अब टोल में छूट सिर्फ उन्हीं वाहनों को मिलेगी, जिनके पास वैध फास्टैग या वार्षिक पास होगा। केवल पहचान पत्र दिखाकर टोल से छूट पाने की सुविधा खत्म कर दी गई है। सरकारी वाहनों के लिए भी वैध पास जरूरी कर दिया गया है।
बार-बार हाईवे का उपयोग करने वालों के लिए वार्षिक फास्टैग पास एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है, जिसकी कीमत 1 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है और इसके तहत एक साल में करीब 200 यात्राएं की जा सकती हैं।
वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने वाहन में फास्टैग लगवाकर उसे सक्रिय कर लें, पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें और केवाईसी पूरी तरह अपडेट रखें, ताकि टोल प्लाजा पर किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।



