इंदौर के अधिकारियों की ‘इसरो’ और ‘नासा’ में डिमांड !

Date:

AI Audio Companion Ready to stream
0:00
0:00 left

इंदौर के अधिकारियों की ‘इसरो’ और ‘नासा’ में डिमांड !

पिछले तीन सप्ताह से ‘लोगों की बात’ आप तक इस कॉलम के माध्यम से पहुंचाने की कोशिश की है। इस बीच बहुत सारे सवाल आपकी तरफ से मुझे पहुंचाए गए। इस बार के कॉलम में कोई बातचीत न करते हुए आपके सवालों को थोड़ा ‘घुमक्कड़ी’ तड़का लगाकर यहां परोस रहा हूं…स्वाद न आए तो थोड़ा जीरावन छिड़क लेना…

-भिया, अगर अपने इंदौर में उत्तराखंड, दिल्ली, मुंबई की तरह बारिश हो जाए तो क्या होगा? यहां तो नाव भी नहीं चला पाओगे, सड़कों पर भाजपा के राज में भी ‘दिग्विजयी’ गड्‌ढे मुंह फाड़े खड़े हैं, जो पलक झपकते टू व्हीलर निगल जाते हैं। कहीं नाव निगल गए तो बेचारी नाव सोचेगी, इससे अच्छा कान्ह-सरस्वती में ही डूबा देते। बदबू ही सही, कम से करोड़ों रुपए से साफ किया पानी तो मिलता।

-अपने यहां नगर निगम में जो इंजीनियर आते हैं, आखिर वे कौन सी कॉलेज से पढ़े हैं। रिसर्च करना चाहिए। क्या उनके कॉलेज में एक बार में पूरा कोर्स नहीं पढ़ाया जाता? यह सवाल मन में इसलिए आया कि एक बार करोड़ों रुपए खर्च कर सड़क बन जाती है, जैसे ही बनकर तैयार होती है नगर निगम के ही दूसरे विभाग के इंजीनियर उस पर टूट पड़ते हैं। वे इस ताक में बैठे रहते हैं कि कब बने और वे कब पाइप डालने के लिए इसे फिर से खोद दें।

-अपने यहां ट्रैफिक सुधार में जो भी अधिकारी व विशेषज्ञ हैं, उन्हें बार-बार सैल्यूट करने का मन करता है। आपका भी करता ही होगा, क्योंकि उनका काम ही ऐसा है। जब भी कोई नया नियम लागू होता है तो कहा जाता है कि ट्रैफिक विभाग ने विशेषज्ञों के साथ सर्वे किया है। यह सर्वे कहां होता है, किससे पूछताछ की जाती है, क्या-क्या देखा जाता है, यह किसी को आज तक नहीं पता। कभी जवाहर मार्ग वन वे कर दो, कभी राजवाड़ा से ई-रिक्शा हटा दो, कभी चौराहों के सिग्नल के टाइम कम कर दो..वगैरह…वगैरह। क्या कोई बता सकता है कि इन सर्वे के आधार पर लागू एक भी प्रयोग सफल रहा हो? और अगर सफल रहा हो तो कुछ दिनों बाद ही बिना शोर-शराबे के आदेश वापस क्यों ले लिए जाते हैं?

-अधिकारियों जैसे ही हमारे नेताओं के भी हाल हैं। कोई भी योजना आती है, तो उन्हें भी बैठक में बुलाया जाता है। राय ली जाती है, उस समय वे चुप रहते हैं। जैसे ही योजना जमीन पर आती है, उनका ‘इंदौर प्रेम’ जाग जाता है और जनता की सारी समस्याएं उसी वक्त उन्हें याद आती हैं। ऐसा लगता है, जैसे पूरे शहर की जिम्मेदारी उन्हीं के ऊपर है। बीआरटीएस के साथ भी ऐसा हुआ, अब मेट्रो के साथ भी हो रहा है।

-हमारे यहां के अधिकारियों पर रह-रह कर कोई अदृश्य शक्ति हावी हो जाती है। वे कई ऐसे फैसले न केवल लेते हैं, बल्कि सख्ती से लागू भी करवाते हैं जिसे देखकर यही लगता है कि इंदौर में पदस्थ विकास से अतृप्त किसी पूर्व अधिकारी की आत्मा शहर से बदला लेने के लिए उनसे ऐसा करवाती है। ज्यादा दूर जाने की जरूरत क्या है? बीआरटीएस के आसपास की दुकानों के देर रात तक खोले रखने के फैसले को ही ले लीजिए। जब यह फैसला किया गया तो जनता व कुछ नेताओं ने भी विरोध किया, लेकिन किसी की सुनी नहीं गई। अंत में वही हुआ जो होना था, फैसला वापस ले लिया गया।

-इंदौर में अब तक जितने किस्म के प्रयोग हुए हैं, उसे देखकर ‘इसरो’ और ‘नासा’ वाले भी दंग हैं। वे इस बात से दु:खी हैं कि बेकार ही वे बड़े-बड़े वैज्ञानिकों पर करोड़ों खर्च करते हैं। इससे तो अच्छे अपने इंदौर की ‘प्रयोगशाला’ वाले हैं? शायद बात आपको हजम नहीं हो, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब यहां के कई अधिकारी और नेता कम से कम ‘इसरो’ में तो जरूर नजर आएंगे….

Ardhendu Bhushan - Consulting Editor
Ardhendu Bhushan - Consulting Editorhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

एमपी के मैहर में नवरात्रि के पहले दिन मां शारदा के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालु की भीड़

मैहर में मां शारदा के दर्शन के लिए नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था कड़ी की।

आखिर हर बार क्यों ‘जीत’ जाते हैं भूमाफिया, शासन-प्रशासन, कायदे-कानून पर कैसे पड़ जाते हैं भारी?

इंदौर में भूमाफियाओं का दबदबा बढ़ता जा रहा है। प्रशासन और पुलिस के बावजूद जमीन विवादों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

इंदौर में तीसरे टी20 में प्लेइंग XI में बदलाव, वैभव सूर्यवंशी को मौका?

इंदौर में तीसरे टी20 मैच के लिए टीम इंडिया की प्लेइंग XI में बदलाव हो सकता है। खासकर वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने की संभावना है।

एलआईजी-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर पर 1.25 घंटे की बहस, 350 करोड़ लागत पर सवाल

इंदौर में एलआईजी-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर करीब 1.25 घंटे की बहस हुई। ₹350 करोड़ लागत और तकनीकी मुद्दों पर सवाल उठे।

दिल्ली में 12 अक्टूबर को INDIA गठबंधन का बड़ा विरोध मार्च, राहुल-ममता भी शामिल

दिल्ली में 12 अक्टूबर INDIA गठबंधन का बड़ा विरोध मार्च आयोजित होगा। राहुल गांधी और ममता बनर्जी भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे।

प्रशांत किशोर बोले: ‘लोगों का चुनाव आयोग से भरोसा उठा’

प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग पर भरोसे का संकट बताया और CJP आंदोलन की बढ़ती ताकत पर कहा कि यह जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की भी मांग की।

कॉकरोच जनता पार्टी का बड़ा ऐलान, अजिंक्य शिंदे बोले- कल फिर जंतर-मंतर पर आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान किया है। अजिंक्य शिंदे ने फिर से कूच की घोषणा की है। आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित है।

सोनम वांगचुक ने कहा देश में अघोषित इमरजेंसी, दिल्ली प्रोटेस्ट पर पुलिस कार्रवाई पर भड़के

सोनम वांगचुक ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर कहा देश में अघोषित आपातकाल है। उन्होंने नेताओं की रिहाई तक अनशन की चेतावनी दी।

भूमाफियाओं के आगे एक बार फिर सब ने टेके घुटने, अयोध्यापुरी की जमीन नहीं बचा सका प्रशासन

अयोध्यापुरी की जमीन विवाद में अदालत ने कल्याण समिति का दावा खारिज कर दिया। प्रशासन भूमाफियाओं के दबाव में कमजोर साबित हुआ।

राहुल गांधी और थलपति विजय कैफे में मिले, कॉफी और कुकीज का आनंद लिया

राहुल गांधी और थलपति विजय कैफे में मिले, कॉफी और कुकीज का आनंद लिया। चेन्नई में दोनों नेताओं की अनौपचारिक मुलाकात ने राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दिया।