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मणिपुर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने संपत्तियों और दोषियों की जानकारी मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से जातीय हिंसा के दौरान हुई आगजनी और कब्जाई गई संपत्तियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने को कहा। अदालत ने निर्देश दिया है कि राज्य सरकार उन संपत्तियों की सूची सौंपे, जो या तो पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को इन घटनाओं में शामिल दोषियों और संपत्तियों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण सीलबंद लिफाफे में देना होगा। इस मामले पर अगली सुनवाई 20 जनवरी 2024 को शुरू होने वाले हफ्ते में होगी।

पुनर्वास और मुआवजे के लिए समिति
पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया की निगरानी के लिए हाईकोर्ट की तीन पूर्व महिला जजों की एक समिति का गठन किया था। इसके अलावा, मणिपुर में आपराधिक मामलों की जांच के लिए महाराष्ट्र के पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पडसगिकर को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
मणिपुर हिंसा की पृष्ठभूमि
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हिंसा की शुरुआत: 3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की।
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प्रदर्शन: कुकी समुदाय ने पहाड़ी जिलों में मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में शामिल होने की मांग का विरोध किया।
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हिंसा का प्रभाव: अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।



