इंदौर। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान डेली कॉलेज पिछले काफी समय से चर्चा में है। पैरेंट्स से लेकर ओल्ड डेलियन्स तक कई तरह के आरोप लगातार लगा रहे हैं। वर्तमान में डीसी बोर्ड के सबसे सक्रिय सदस्य धीरज लुल्ला ने 64 पेज संवाद निकालकर इन आरोपों पर लीपापोती करने की कोशिश की है। उनके जवाबों पर अब पैरैंट्स और अन्य सदस्य खुलेआम टिप्पणी कर रहे हैं। इंस्टाग्राम पर वॉइस ऑफ़ डीसी के नाम से एक नया संवाद वायरल हो रहा है, जिसमें लुल्ला पर कई तरह के सवाल उठाए गए हैं। हम इसमें बिना कोई फेरबदल किए इसे आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं-
अगला चुनाव!
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वाह, कितना सुविधाजनक।
श्री ‘बुल्ला’ कहते हैं कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।
पर ऐसे ही कैसे चले जा सकते हैं आप?
अपने 10 लालची वर्षों में आपने 150 साल की विरासत को मिटा दिया –
एक शानदार संस्था को अहंकार और सौदों के गढ़ में बदल दिया।
आप बस एक 64 पेज की “संवाद” नामक दिखावे की किताब भेजकर गायब नहीं हो सकते!
आपने डीसी से जुड़े ऊँचे संपर्कों का उपयोग और भीख दोनों मांगी-
ताकि अच्छे शासन का अधिकार छीन लिया जाए और AGM (वार्षिक आम बैठक) रद्द की जा सके।
तो पहले AGM वापस लाओ, फिर जाओ।
आपने माता-पिता के करोड़ों रुपये “कंसल्टेंट्स” पर बर्बाद किए –
सुधार के लिए नहीं, बल्कि अपने बोर्डरूम सौदों को ढकने के लिए।
वो पैसा वापस करो – और फिर जाओ।
Deloitte रिपोर्ट वापस करो-और फिर जाओ।
आपने स्कूल को घुटनों पर ला दिया,
और अब अपनी Audi, Porsche, BMW 6 में बैठकर भागने की योजना बना रहे हो-
पीछे छोड़कर वो मलबा, जो कभी गौरवशाली संस्था हुआ करता था।
हाँ, एक चीज़ के लिए धन्यवाद –
आपने हर निर्माण का दस्तावेज़ तो रखा।
अब उन सभी का फॉरेंसिक ऑडिट हो –
और फिर आप जा सकते हैं।
आप लोकतांत्रिक चुनाव से आए थे।
तो अब हम लोकतांत्रिक तरीके से जाने की चुनौती देते हैं।
आपने दावा किया था कि आपने “सबसे ज़्यादा वोटों से जीता”
(हालाँकि इंदौर से हारकर चोरी हुए मतपत्रों से बचे थे)।
तो अब –
ईमानदारी से हारो। खुलकर हारो। जनता के सामने हारो।
और फिर जाओ।
आप “सुधारक” बनकर आए थे,
अब “यादगार” बनकर जा रहे हो –
इस बात की याद दिलाने के लिए कि लालच विरासत को कैसे निगल जाता है।


