वाइस ऑफ डीसी में डेली कॉलेज ने लगाई गुहार, मुझे एक टर्म के लिए अकेला छोड़ दो, मैं खुद को फिर संभाल लूंगा

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इंदौर। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में काबिज डीसी बोर्ड की मनमानी के विरुद्ध पैरेंट्स, सदस्य और ओल्ड डेलियन लगातार आवाज उठा रहे हैं। इंस्टाग्राम पर वाइस ऑफ डीसी के नाम से हर दिन लोग अपनी टिप्पणियां कर रहे हैं। इसी ग्रुप पर डीसी बोर्ड के सदस्य धीरज लुल्ला से लेकर मोनू भाटिया तक को लोग निशाना बना चुके हैं। अब एक ताजा पोस्ट में डेली कॉलेज को गुहार लगाते बताया गया है।

वायस ऑफ डीसी का पोस्ट आपके सामने है-

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कृपया… मुझे एक टर्म के लिए अकेला छोड़ दो।
मैंने तरक्की की है, चमका हूँ, तुम्हें गर्व महसूस करवाया है — वो भी बिना लगातार शासन के।

मेरे प्रिंसिपल कभी मुझे नेतृत्व देते थे,
मेरे शिक्षक मुझे जुनून से गढ़ते थे,
और हम मिलकर देश के बेहतरीन स्कूलों में से एक बने थे।

तब बोर्ड मेरी सेवा करता था –
मुझे देखभाल, मार्गदर्शन और सम्मान मिलता था।

अब मैं ही 24×7 बोर्ड की सेवा करने में लगा हूँ।
थक गया हूँ…मेरे पास अब अपने बच्चों के लिए भी समय नहीं बचता।

कृपया… मुझे वो पुराने दिन लौटा दो।

मुझे ऊँची तनख्वाह वाले प्रिंसिपल नहीं चाहिए,
मुझे दिल वाले प्रिंसिपल चाहिए।

मुझे कंसल्टेंट और आर्किटेक्ट नहीं चाहिए-
मुझे ऐसे मेंटर्स चाहिए जो इमारतें नहीं, इंसान बनाएं।

कृपया मेरे शिक्षकों की नियुक्ति मेरिट पर होने दो,
न कि सरनेम या कॉन्टैक्ट के आधार पर-
तब मेरे बच्चों को ट्यूशन नहीं, सिर्फ मेरे मैदानों पर खेलने का वक्त चाहिए होगा।

मेरे प्रीफ़ेक्ट्स का सम्मान हो,
सिर्फ इसलिए न चुने जाएँ कि वे किसके करीब हैं।

अनुशासन सबके लिए बराबर हो,
न कि इस आधार पर कि किसके माता-पिता बोर्ड में बैठे हैं।

मुझे फिर से न्यायपूर्ण होने दो।

मैंने युद्ध देखे हैं, महामारी झेली है, पीढ़ियाँ बदली हैं-
यह भी सह लूँगा…
बस मुझे “गवर्न” करते-करते मारो मत।

पहले मैं तुम्हारा गर्व था,
अब मैं तुम्हारा प्रोजेक्ट सा महसूस होता हूँ।

कृपया…उसे मत सुधारो जो टूटा ही नहीं था।

मुझे और सदस्यों की ज़रूरत नहीं…
मेरे पास पहले ही बहुत सारे मालिक हैं।

मुझे मैनेजर नहीं…
एक मेंटर चाहिए।

हर नया सदस्य एक और हाथ है
जो मुझे एक नई दिशा में खींचता है।

मैं टूट रहा हूँ।
मैं बस फिर से साँस लेना चाहता हूँ।

तुम कुर्सियाँ बढ़ा रहे हो,
जब मुझे हवा चाहिए।

मुझे मेरी पुरानी आत्मा,
मेरी आज़ादी,
मेरे प्रिंसिपल,
मेरी गरिमा लौटा दो।

मैं वादा करता हूँ …
मैं खुद को फिर संभाल लूँगा !

आखिर क्यों विवादों में है डेली कॉलेज

दरअसल डेली कॉलेज का संचालन करने वाले वर्तमान डीसी बोर्ड में धीरज लुल्ला और मोनू भाटिया जैसे सदस्य संस्थान का संविधान बदलने की कोशिश में लगे हैं ताकि चुनाव ही नहीं कराना पड़े। इसके लिए शासन-प्रशासन तक जोर लगाया जा रहा है। रिश्वत तक की पेशकश की गई, जब इससे बात नहीं बनी तो संघ के पदाधिकारियों के माध्यम से दबाव बनाया गया। अब नियमों के विपरित 12 नवंबर को डीसी बोर्ड की बैठक बुलाकर संविधान बदलने की तैयारी है।

फर्म एंड सोसायटी से लेकर कलेक्टर तक शिकायत

डेली कॉलेज के पैरेंट्स से लेकर कई सदस्य इस मामले की शिकायत फर्म एंड सोसायटी से लेकर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा तक से कर चुके हैं। पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर इस मामले की पूरी जानकारी दी थी। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से कहा कि डीसी बोर्ड ने 25 अक्टूबर को एक नोटिस जारी कर 12 नवंबर को एक बैठक बुलाई है। इसमें बोर्ड के सिर्फ 9 सदस्य ही उपस्थित रहेंगे। नियम के विपरित यह मीटिंग बुलाकर डीसी बोर्ड संविधान में संशोधन करना चाहता है जिससे कि वह हमेशा सत्ता में रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इससे जुड़ा केस अभी सक्षम अधिकारी के समक्ष लंबित है और यह बोर्ड अपने पावर का दुरुपयोग कर संविधान में संशोधन कर के अपना हित पूरा करना चाहता। इससे संस्थान का नुकसान होगा।

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