सीधी में लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान जनजाति कार्य विभाग के एक कर्मचारी को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। यह मामला सीधी कलेक्ट्रेट परिसर के जनजातीय कार्य विभाग कार्यालय का है। लोकायुक्त पुलिस रीवा की टीम ने इस कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
लोकायुक्त पुलिस ने जनजाति कार्य विभाग में किया ट्रैप
लोकायुक्त पुलिस रीवा की 15 सदस्यीय टीम ने निरीक्षक नरेश बेहरा के नेतृत्व में जनजाति कार्य विभाग के कार्यालय में संजय सिंह नामक कर्मचारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। संजय सिंह प्रभारी मंडल संयोजक के पद पर कार्यरत हैं।
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शिकायतकर्ता अशोक कुमार योगी, जो पहले विभाग में दैनिक वेतनभोगी रसोइया थे, ने शिकायत की थी कि उन्हें नौकरी पर दोबारा रखने और पिछले तीन वर्षों का वेतन दिलाने के लिए रिश्वत मांगी गई थी।

रिश्वत मांगने की पूरी कहानी और रकम
शिकायत के अनुसार, कुल 50 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से पहले ही 10 हजार रुपये संजय सिंह ने ले लिए थे। लोकायुक्त टीम ने 40 हजार रुपये लेते हुए संजय सिंह को गिरफ्तार किया।
यह रकम नौकरी पर पुनः नियुक्ति और पिछले वेतन के लिए दी जा रही थी। अशोक योगी पिछले लगभग तीन साल से विभाग में कार्यरत नहीं थे और वेतन भुगतान की मांग कर रहे थे।
लोकायुक्त पुलिस की जांच में अधीक्षिका की भूमिका भी सामने आई
लोकायुक्त निरीक्षक नरेश बेहरा ने बताया कि मामले में अधीक्षिका सुनीता पांडेय की भूमिका की भी जांच की जा रही है। शिकायत में आरोप हैं कि वे भी इस रिश्वत मांगने की साजिश में शामिल थीं।
यह जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं। लोकायुक्त की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी चेतावनी मानी जा रही है।
लोकायुक्त की कार्रवाई से आम जनता को मिलेगा भरोसा
इस कार्रवाई से जनता में सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ेगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम लोगों को न्याय दिलाने में मदद करेंगे। वहीं, सरकारी कर्मचारियों को भी ईमानदारी से काम करने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
लोकायुक्त की यह कार्रवाई अन्य विभागों के लिए भी एक मिसाल साबित होगी।
भविष्य में ऐसे मामलों की जांच और सख्ती बढ़ेगी
लोकायुक्त पुलिस ने इस कार्रवाई को लेकर स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और सख्ती बढ़ाई जाएगी। ऐसे मामलों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए टीम सक्रिय है।
आशा की जा रही है कि इससे सरकारी कर्मचारियों में भय का माहौल बनेगा और रिश्वतखोरी पर अंकुश लगेगा।
शिकायतकर्ता की शिकायत से शुरू हुई यह कार्रवाई
अशोक कुमार योगी की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने यह कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि वे करीब तीन साल से विभाग में कार्यरत नहीं थे और उनके वेतन की मांग के साथ-साथ नौकरी पर दोबारा रखने की गुहार थी।
शिकायत मिलते ही लोकायुक्त पुलिस ने मामले की गहन जांच कर ट्रैप की योजना बनाई और आरोपी को पकड़ लिया।



