मणिपुर हिंसा के कारण सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को इंफाल में मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव छोड़ने से तनाव बढ़ गया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि संदिग्ध उग्रवादियों ने जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने गए लोगों पर गोलीबारी की, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। विरोध स्वरूप मृतकों के शव मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के आवास के बाहर रखे गए, जिससे भारी तनाव उत्पन्न हुआ।
इंफाल पूर्व और कांगपोकपी सीमा पर हिंसा की घटना
सुबह लगभग 7 बजे खोंगबाल सुनुरोक उयोक / नोंगशुम के जंगलों में लगभग 16 लोग जलाऊ लकड़ी लेने गए थे। तभी संदिग्ध उग्रवादियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में अरुबम रोनिल, लैरेनलाकपम इनाओबी और क्षेत्रिमायुम सुशील की मौत हुई। तीन लोग घायल हैं, जिनमें मेइसनाम सोमेंद्रो, एन. सूरज और के. बोसन शामिल हैं। साथ ही तीन लोग लापता बताए गए हैं। यह इलाका इंफाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों की सीमा पर है, जहां सुरक्षा की स्थिति पहले से तनावपूर्ण है।
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मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन
हताहतों की खबर फैलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने गुस्से में आकर इंफाल के बाबुपारा स्थित मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के सरकारी आवास के मुख्य गेट के बाहर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सुबह लगभग 7:00 से 9:30 बजे के बीच हुआ। प्रदर्शनकारियों ने उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। बाद में शवों को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) अस्पताल ले जाया गया।
सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया और पुलिस कार्रवाई
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े ताकि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया जा सके। पुलिस ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है और तीन लापता लोगों की तलाश जारी है। साथ ही संदिग्ध उग्रवादियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश बढ़ा दी गई है। स्थानीय विधायक थोकचोम लोकेशोर सिंह ने भी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है और पास स्थित सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स (SoO) कैंप हटाने की बात कही है।
मणिपुर में बढ़ते समुदायिक तनाव का प्रभाव
मणिपुर के पहाड़ी जिलों में लंबे समय से जारी हिंसा और समुदायों के बीच तनाव इस घटना के पीछे एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इससे पहले भी कामजोंग जिले के चस्साद गांव में कुकी और नागा समुदायों के बीच झड़प हुई थी। लगातार बढ़ती हिंसा के कारण आम जनता की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोग भयभीत हैं और स्थिति नियंत्रण से बाहर होने का डर जताते हैं।
आगे की संभावित स्थिति और प्रशासन की भूमिका
मणिपुर में इस तरह की हिंसा की घटनाएं राज्य में शांति बहाल करने के प्रयासों के लिए बड़ी चुनौती हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह उचित सुरक्षा प्रबंधों के साथ स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास कायम करे। आगामी दिनों में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई तनाव कम करने में निर्णायक साबित होगी। वहीं, स्थानीय नेताओं और नागरिकों को भी शांति बनाए रखने में सहयोग करना होगा। अन्यथा स्थिति और गंभीर हो सकती है।



