कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों का उद्देश्य है “आरएसएस के तंत्र वाली रिजीम” को चुनाव के माध्यम से बदलना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन चुनावों के जरिए होना विपक्ष की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
पवन खेड़ा ने राजनाथ सिंह के बयान पर दिया जवाब
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विपक्ष पर “रिजीम चेंज” की साजिश रचने के आरोप के बाद पवन खेड़ा ने पलटवार किया। उनका कहना था कि चुनाव के जरिए सरकार बदलना कोई अपराध नहीं बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना है। उन्होंने पूछा कि अगर विपक्ष को सत्ता परिवर्तन का हक नहीं है तो लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाएगा।
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“वोट चोर गद्दी छोड़” अभियान से सरकार को चुनौती
पवन खेड़ा ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने “वोट चोर गद्दी छोड़” नाम से एक देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता को जागरूक करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के चुनावों में बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में मतदाताओं को मतदान से वंचित किया गया।
विदेशी हस्तक्षेप और बांग्लादेश कनेक्शन के आरोपों का खंडन
भाजपा द्वारा कांग्रेस पर विदेशी प्रेरणा लेने और बांग्लादेश से जुड़े होने के आरोपों को पवन खेड़ा ने पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसी अन्य देश से प्रेरणा लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि पार्टी के पास स्वतंत्रता संग्राम के आदर्श और लोकतांत्रिक मूल्य हैं। यह बयान भाजपा के आरोपों को सीधे चुनौती देता है।

1977 के चुनावों का जिक्र कर लोकतांत्रिक परंपरा की याद दिलाई
अपने बयान में पवन खेड़ा ने 1977 के आम चुनावों का उदाहरण दिया, जब देश में लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन हुआ था। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि भारत में लोकतंत्र मजबूत है और चुनावों के जरिए सरकार बदलना स्वाभाविक है। यह तर्क वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में विपक्ष के दृष्टिकोण को सही ठहराता है।
प्रशांत भूषण और आइसा के बयानों का समर्थन
पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की बात करना राष्ट्र विरोधी नहीं हो सकती। इस संदर्भ में उन्होंने विपक्ष की संवैधानिक जिम्मेदारी को दोहराते हुए कहा कि विरोध करना लोकतंत्र की ताकत है।



