मध्यप्रदेश कर्मचारी आयोग के पुनर्गठन से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणा सामने आई है। नई अधिसूचना के अनुसार, राज्य कर्मचारी आयोग का पुनर्गठन किया गया है और इस पुनर्गठित आयोग का अध्यक्ष मलय श्रीवास्तव बनाए गए हैं। यह पुनर्गठन कर्मचारी आयोग के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
मध्यप्रदेश कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष मलय श्रीवास्तव की नियुक्ति
मध्यप्रदेश कर्मचारी आयोग के पुनर्गठन के तहत 1990 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मलय श्रीवास्तव को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मलय श्रीवास्तव की नियुक्ति से आयोग को अनुभव और प्रशासनिक दक्षता मिलेगी।
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इस नियुक्ति के साथ ही आयोग के कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। मलय श्रीवास्तव का प्रशासनिक करियर प्रभावशाली रहा है, जो इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
आयोग में सदस्यों की नियुक्ति और उनकी भूमिकाएं
पुनर्गठित मध्यप्रदेश कर्मचारी आयोग में सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है। सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह को न्यायिक सेवा सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा सेवानिवृत्त कार्यालय अधीक्षक बादाम सिंह को गैर-प्रशासनिक सदस्य नियुक्त किया गया है।
साथ ही, पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा संचालनालय के संचालक को अतिरिक्त प्रभार के साथ सदस्य बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के सचिव स्तर के नामांकित अधिकारी भी आयोग के सदस्य रहेंगे।
आयोग के सचिव के रूप में अजय चौबे की नियुक्ति
मध्यप्रदेश कर्मचारी आयोग के पुनर्गठन के अंतर्गत वित्त विभाग के सेवानिवृत्त उपसचिव अजय चौबे को आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है। अजय चौबे की नियुक्ति से आयोग के प्रशासनिक कार्यों में सुव्यवस्था और गति आने की संभावना है।
सचिव के रूप में उनकी भूमिका आयोग के समग्र संचालन को प्रभावी बनाएगी और कार्यों के समन्वय में सहायता प्रदान करेगी।
पुनर्गठित आयोग के कुल पद और कार्य क्षेत्र
मध्यप्रदेश कर्मचारी आयोग में अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव को मिलाकर कुल 7 पद निर्धारित किए गए हैं। यह पुनर्गठन आयोग के कार्यक्षेत्र को स्पष्टता और सुव्यवस्था प्रदान करेगा।
आयोग के विचारणीय विषय और कार्य 12 दिसंबर 2019 को जारी राजपत्र में दिए गए प्रावधानों के अनुसार यथावत रहेंगे। इससे आयोग की पूर्व निर्धारित जिम्मेदारियां बनी रहेंगी।
मध्यप्रदेश कर्मचारी आयोग का इतिहास
मध्यप्रदेश कर्मचारी आयोग की स्थापना सबसे पहले कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में हुई थी। हालांकि, बाद में इसे शिथिल कर दिया गया था। इस बार पुनर्गठन से आयोग को पुनः सक्रिय करने की कोशिश की गई है।
आयोग के पुनर्गठन से कर्मचारी हितों की रक्षा और सरकारी सेवाओं के बेहतर प्रबंधन की उम्मीद है। यह कदम कर्मचारी प्रशासनिक सुधारों की दिशा में अहम माना जा रहा है।



