मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। यह संवैधानिक नियुक्ति भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को की है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का स्थान लेंगे, जो सितंबर 2021 से इस पद पर कार्यरत थे।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक और व्यक्तिगत परिचय
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव में हुआ था। वे एक चिकित्सक हैं जिन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा में सिवनी जिले की बरघाट सीट से चार बार विधायक के रूप में सेवा दी। इसके अतिरिक्त, 2019 में वे बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए।
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डॉ. बिसेन का राजनीतिक सफर काफी समृद्ध रहा है। उन्होंने 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर वन, परिवहन, स्कूल शिक्षा और जेल विभागों का प्रभार संभाला। इसके अलावा, वे 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश के चौथे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे।

उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रूप में डॉ. बिसेन की नियुक्ति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को छह राज्यों के लिए नए राज्यपाल नियुक्त किए। उत्तराखंड के राज्यपाल पद पर डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति इस फेरबदल का हिस्सा है। इससे पहले यह पद लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) के पास था।
डॉ. बिसेन की नियुक्ति से उत्तराखंड के प्रशासनिक नेतृत्व में नया बदलाव आएगा। उनके अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वे राज्य के विकास और सामाजिक समरसता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राज्यपाल के संवैधानिक कर्तव्य और उत्तराखंड पर प्रभाव
राज्यपाल का पद संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। वे राज्य सरकार के प्रमुख होते हैं और राज्य के संवैधानिक कामकाज की देखरेख करते हैं। डॉ. ढाल सिंह बिसेन के उत्तराखंड के राज्यपाल बनने से राज्य में शासन व्यवस्था और बेहतर होगी।
डॉ. बिसेन के अनुभव और राजनीतिक समझ से राज्यपाल पद की गरिमा बढ़ेगी। वे राज्य के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मामलों पर सलाहकार के रूप में भी काम करेंगे। इससे आम जनता को भी लाभ होगा क्योंकि राज्यपाल का पद नीति-निर्माण में सहायक होता है।
मध्य प्रदेश से उत्तराखंड तक का राजनीतिक सफर
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश से शुरू होकर अब उत्तराखंड तक पहुंचा है। वे मध्य प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता रहे हैं। चार बार विधायक और एक बार सांसद के रूप में उनकी सेवा ने उन्हें एक अनुभवी नेता बनाया है।
उनकी कैबिनेट मंत्री के रूप में सेवा और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पद ने उन्हें प्रशासनिक और वित्तीय मामलों की गहरी समझ दी है। अब उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति एक नई जिम्मेदारी है, जिसमें वे राज्य के विकास में योगदान देंगे।
देश के अन्य राज्यों में भी हुए राज्यपालों के बदलाव
12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति ने छह राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए हैं। इसमें केरल के लिए ओम प्रकाश माथुर, कर्नाटक के लिए डॉ. सुधा यादव, सिक्किम के लिए दुष्यंत गौतम, तमिलनाडु के लिए राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और ओडिशा के लिए बृज मोहन राम शामिल हैं।
इस व्यापक फेरबदल से केंद्र सरकार ने राज्यों में प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है। ये नियुक्तियां राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं, जो केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करेंगी।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति का भविष्य में प्रभाव
डॉ. ढाल सिंह बिसेन के उत्तराखंड के राज्यपाल बनने से राज्य के प्रशासन में नई ऊर्जा और दिशा मिलेगी। उनका अनुभव और ज्ञान राज्य की चुनौतियों से निपटने में सहायक होगा।
इसके अलावा, उनकी नियुक्ति से मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के राजनीतिक संबंध भी मजबूत हो सकते हैं। आम जनता को उम्मीद है कि डॉ. बिसेन अपनी भूमिका में न्यायपूर्ण और विकासोन्मुख निर्णय लेंगे।



