फलाहारी महाराज के दावे झूठे हैं, विराट कोहली के प्रवक्ता ने प्रेमानंद महाराज पर लगाए गए ₹5 करोड़ के आरोपों का पूरी तरह खंडन किया है। इस बयान ने इस विवाद को नया मोड़ दिया है, जो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ था।
फलाहारी महाराज के आरोपों का विस्तार
दिनेश शर्मा, जो श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष और फलाहारी महाराज के नाम से जाने जाते हैं, ने हाल ही में वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज और उनके आश्रम ‘केलीकुंज’ को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विराट कोहली को ₹5 करोड़ की राशि देकर आश्रम के दर्शन करवाए गए ताकि महाराज की प्रसिद्धि बढ़ाई जा सके। यह आरोप आश्रम और इसके शिष्यों के बीच उठे विवाद के बाद सामने आया।
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विराट कोहली के प्रवक्ता ने कड़े शब्दों में किया खंडन
7 अक्टूबर 2026 को विराट कोहली की टीम ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों का पूरी तरह खंडन किया। प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि फलाहारी महाराज के आरोप “झूठे, बेबुनियाद और तथ्यों से परे” हैं। उन्होंने बताया कि विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा आश्रम में दर्शन केवल अपनी आस्था और श्रद्धा के कारण करते हैं, न कि किसी वित्तीय या व्यावसायिक लेन-देन के तहत।
विराट- अनुष्का और प्रेमानंद महाराज के बीच पुराना संबंध
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा पहली बार जनवरी 2023 में वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचे थे। तब से वे कई बार व्यक्तिगत आस्था के तहत संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए जाते रहे हैं। यह यात्रा उनकी धार्मिक आस्था का हिस्सा है और इससे क्रिकेटर के प्रदर्शन पर भी सकारात्मक असर माना जाता है।
आश्रम विवाद और रसिक दुलारी शरण की मौत का प्रभाव
प्रेमानंद महाराज के आश्रम में अचानक उठे विवाद की पृष्ठभूमि में उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण (दीपक लोदी) का निधन है। 25 सितंबर को उनकी मौत ने आश्रम की छवि पर सवाल खड़े किए। इस घटना के बाद आश्रम पर कई तरह के आरोप और अफवाहें फैलने लगीं, जिनमें फलाहारी महाराज के ₹5 करोड़ के दावे भी शामिल हैं।
मीडिया को सावधानी बरतने की विराट की टीम ने दी सलाह
विराट कोहली के प्रवक्ता ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे इस तरह के आरोपों को बिना जांच-पड़ताल और पुष्ट तथ्यों के प्रसारित न करें। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार रिपोर्टिंग ही समाज में सही सूचना पहुंचाने का माध्यम है। यह बयान अन्य संदिग्ध खबरों और अफवाहों को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



