मध्यप्रदेश में कूनो से गांधी सागर नई मादा चीता CCB-2 के आगमन से चीतों का कुनबा बढ़ेगा। यह कदम प्रोजेक्ट चीता के तहत प्रदेश में चीता संरक्षण को और मजबूत करेगा। कूनो राष्ट्रीय उद्यान से गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में मादा चीता CCB-2 20 सितंबर को स्थानांतरित की जाएगी।
नई मादा चीता CCB-2 के गांधी सागर पहुंचने का महत्व
मादा चीता CCB-2 का गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में पहुंचना मध्यप्रदेश में चीतों के संरक्षण के लिए अहम कदम है। इससे चीतों का प्राकृतिक प्रजनन और क्षेत्रीय विस्तार संभव होगा। कूनो से गांधी सागर तक इस शिफ्टिंग से चीतों का कुनबा बढ़ेगा और उनकी संख्या में वृद्धि होगी।
👉 यह भी पढ़ें:
- मध्यप्रदेश में पहली बार, छोटे अपराधियों को जेल की बजाय सामुदायिक सेवा की सजा
- दमोह में सगाई समारोह के दौरान होटल रसोई में आग लगी, एक की मौत
- मध्यप्रदेश में 7400 से ज्यादा मेधावी छात्रों को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी स्कूटी
- सागर में अब तक 34.3 इंच बारिश, सीजन के 11 दिनों में 14 इंच और चाहिए
- भोपाल फर्जी IAS तृप्ति सिंह केस में पुलिस अधिकारी पर रिश्वत का आरोप, 2 लाइन अटैच
- लड़की के अपहरण मामले में भाजपा-कांग्रेस विधायकों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
यह कदम प्रदेश में चीतों के आवास और संरक्षण की दिशा में एक नई शुरुआत साबित होगा। इससे क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।

कूनो से गांधी सागर तक प्रोजेक्ट चीता का विस्तार
प्रोजेक्ट चीता के तहत अब तक कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 53 चीतों की संख्या पहुंच गई है। गांधी सागर में पहले से तीन चीते मौजूद हैं। नई मादा चीता CCB-2 के आने से यहां चीतों की संख्या बढ़ेगी।
फरवरी 2026 में बोत्सवाना से लाए गए चीतों ने कूनो में अनुकूलन प्रक्रिया पूरी की है। अब इस विस्तार से मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण की कवायद और अधिक प्रभावी होगी।
भारत में जन्मे चीतों की अगली पीढ़ी का विकास
KGP12 नामक मादा चीता ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया है। यह मादा दक्षिण अफ्रीका से आई मादा गामिनी की संतान है। इस तरह भारत में जन्मे चीतों की अगली पीढ़ी का विकास हो रहा है।
मार्च 2026 में ज्वाला नामक मादा चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया था। अब कुल मिलाकर भारत में जन्मे चीतों की संख्या 36 हो गई है, जो प्रोजेक्ट चीता की सफलता को दर्शाता है।

चीता संरक्षण में निगरानी और स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर
कूनो और गांधी सागर में चीतों की सुरक्षा के लिए वन विभाग, पशु चिकित्सक और वन्यजीव विशेषज्ञ मिलकर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिक निगरानी और स्वास्थ्य प्रबंधन से चीतों को भारतीय पर्यावरण में अनुकूल बनाने का प्रयास जारी है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों के प्राकृतिक आवास की देखरेख और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश में चीतों का संरक्षण भविष्य की चुनौतियों के बीच
चिताओं की संख्या बढ़ाने के प्रयासों से मध्यप्रदेश देश में चीता संरक्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हालांकि, आवासीय क्षेत्र और पारिस्थितिकी तंत्र की चुनौतियां बनी हुई हैं।
नई मादा चीता CCB-2 के गांधी सागर पहुंचने से संरक्षण के दायरे में वृद्धि होगी। इससे प्रोजेक्ट चीता के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
आगे की योजनाएं और संभावनाएं
प्रोजेक्ट चीता के तहत और अधिक चीतों को विभिन्न अभयारण्यों में स्थानांतरित कर उनका प्राकृतिक प्रजनन बढ़ाने की योजना है। कूनो से गांधी सागर तक नयी मादा चीता की शिफ्टिंग इसका पहला बड़ा कदम है।
आगे भी ऐसी ही पहलें चीतों के संरक्षण और संख्या वृद्धि को सुनिश्चित करेंगी, जिससे मध्यप्रदेश में वन्यजीव पर्यटन और जैव विविधता को भी लाभ मिलेगा।



