भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को सेंसेक्स में 778 अंक की गिरावट दर्ज हुई और निफ्टी 23,150 के नीचे बंद हुआ। यह बाजार में बड़ी कमजोरी का संकेत है जिसने निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश को प्रभावित किया।
सेंसेक्स में 778 अंक की गिरावट का कारण
आज सेंसेक्स में 777.94 अंक यानी करीब 1.04% की गिरावट दर्ज हुई और यह 74,003.82 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 279.50 अंक गिरकर 23,118.60 पर समाप्त हुआ। शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिली, लेकिन बाद में भारी बिकवाली ने बाजार को दबा दिया। विशेष रूप से रियल्टी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर में भारी नुकसान हुआ।
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वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल
पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। यमन में हूथी विद्रोहियों के सऊदी अरब पर हमले और ईरान के साथ खाड़ी देशों के संबंधों में बढ़ी अनिश्चितता ने बाजार की स्थिति को और खराब किया। ब्रेंट क्रूड की कीमतें $107 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ा। इसके कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भारतीय बाजार पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला।
निफ्टी की कमजोर स्थिति और निवेशकों की चिंता
निफ्टी 50 का स्तर 23,150 से नीचे गिरना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निफ्टी 23,500 के ऊपर मजबूती नहीं दिखाता है तो यह 23,070 के आसपास समर्थन स्तर तक गिर सकता है। इस बीच, तकनीकी विश्लेषण में भी निफ्टी के नीचे की ओर रुझान की संभावना जताई जा रही है, जिससे बाजार में और कमजोरी आ सकती है।
सेक्टोरल प्रदर्शन में आई भारी गिरावट
आज के दिन रियल्टी सेक्टर में 4% से अधिक की गिरावट आई जबकि मेटल सेक्टर में करीब 2.5% की कमजोरी देखने को मिली। इसके अलावा, पीएसयू बैंक, ऑटो, फार्मा और प्राइवेट बैंक सेक्टर के शेयर भी 1-2% के बीच टूट गए। आईटी सेक्टर के शेयरों ने थोड़ी राहत दी, लेकिन व्यापक बाजार पर इसका असर कम रहा।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह बाजार गिरावट
सेंसेक्स में 778 अंक की गिरावट और निफ्टी के 23,150 से नीचे बंद होने का असर आम निवेशकों की पूंजी पर पड़ता है। इससे निवेशकों के पोर्टफोलियो का मूल्य घटता है और बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है। इसलिए, निवेशकों को सतर्क रहकर अपने निवेश निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।
आगे बाजार की संभावित दिशा और रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि अगर निफ्टी 23,650 और 24,000 के बीच रेजिस्टेंस पार करता है, तभी बाजार में सुधार की संभावना होगी। फिलहाल, बाजार में दबाव अधिक है और निवेशकों को बाजार के निचले स्तरों पर सावधानी बरतनी चाहिए। अगले कुछ कारोबारी दिनों में वैश्विक आर्थिक स्थिति और घरेलू कारकों पर नजर रखना जरूरी होगा।



