हरतालिका तीज के शुभ अवसर पर सौभाग्येश्वर महादेव के पट 24 घंटे खुले रखे गए, जिससे भक्तों की भारी भीड़ मंदिर में उमड़ी। इस पर्व को लेकर सौभाग्येश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा कार्यक्रम आयोजित किए गए। हरतालिका तीज व्रत के दिन मंदिर में भक्तजन सुबह से ही दर्शन करने पहुंचे।
सौभाग्येश्वर महादेव मंदिर में हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन सौभाग्येश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंदिर के पट 24 घंटे खुले रखे गए हैं, ताकि सभी भक्त निर्बाध रूप से दर्शन कर सकें। यह परंपरा माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव की प्रसन्नता की याद में निभाई जाती है।
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु इस व्रत को रखने के लिए मंदिर पहुंचे हैं। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर यह व्रत विशेष शुभ माना जाता है।
भक्तों की भारी भीड़ और व्यवस्था
हरतालिका तीज के दिन सौभाग्येश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भीड़ सुबह से ही देखने को मिली। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखा है। मंदिर परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए दर्शन करवाए जा रहे हैं।
इसके अलावा, मंदिर में प्रसाद वितरण और जलपान की व्यवस्था भी की गई है। भक्तजन रातभर मंदिर में पूजा-अर्चना करते रहे। प्रशासन ने कहा कि दर्शन का सिलसिला रात 12 बजे तक चलता रहेगा।
हरतालिका तीज व्रत की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज व्रत की पूजा विधि में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा प्रमुख है। ब्रह्म मुहूर्त से पूजा आरंभ की जाती है। इस वर्ष ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:44 बजे से 5:30 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:02 से 12:51 तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:19 बजे तक है।
व्रत के दौरान भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग की पूजा करते हैं। अमृतकाल सुबह 7:18 से 8:57 तक माना जाता है, जो व्रत के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस दिन की पूजा से अखंड सौभाग्य और मनचाहा वर प्राप्त होता है।
मां पार्वती की कठोर तपस्या की कथा
हरतालिका तीज की कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर गंगा तट पर कठोर साधना की। इससे उनके पिता हिमालय पर्वत दुखी हो गए।
महर्षि नारद के सुझाव पर उनका विवाह भगवान विष्णु के साथ तय हुआ, जिससे माता पार्वती दुखी हो गईं। तब वे एक घने जंगल की गुफा में गईं और शिवलिंग बनाकर पूजा की। उनकी तपस्या से महादेव प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान दिया। तब से यह व्रत हर साल मनाया जाता है।
हरतालिका तीज का आम जनजीवन पर असर
इस पर्व से समाज में महिलाओं का उत्साह और धार्मिक आस्था बढ़ती है। महिलाएं सौभाग्य और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। साथ ही, यह पर्व परिवारों को एकजुट करने का भी काम करता है।
हरतालिका तीज के दिन बाजारों में भी रौनक रहती है। पारंपरिक वस्त्र, मिठाइयां और सजावट की वस्तुएं खरीदने में लोगों की भागीदारी बढ़ जाती है। इससे स्थानीय व्यापार को भी लाभ होता है।
सौभाग्येश्वर महादेव मंदिर में आने वाले अगले दिनों की तैयारियां
हरतालिका तीज के बाद भी सौभाग्येश्वर महादेव मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम चलते रहेंगे। मंदिर प्रशासन ने आगामी त्योहारों के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।
यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई और सुरक्षा प्रबंधों को और मजबूत किया जाएगा। मंदिर में आने वाले भक्तों को हर समय पूजा-अर्चना का लाभ मिलेगा।



