प्रदर्शनकारी छात्रों की एफआईआर रद्द होने से छात्रों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में शामिल छात्रों पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
1 सितंबर 2026 को, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बेंच ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्णय लिया। इस आदेश के तहत 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच दर्ज सभी एफआईआर रद्द कर दी गईं।
इसके अलावा, कोर्ट ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इन तिथियों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े किसी भी नए मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।

केंद्र सरकार की भूमिका
केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया था कि एफआईआर वापस ली जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने इसके लिए पूरी प्रतिबद्धता जताई है।
फिलहाल, सरकार ने यह भी कहा कि जिन छात्रों ने इस मुद्दे के कारण आत्महत्या की है, उनके परिवारों को मुआवजा देने के लिए एक नई नीति तैयार की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों पर असर
प्रदर्शनकारी छात्रों को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के इस आदेश के बाद, प्रदर्शनकारी संगठन CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने का निर्णय लिया है।
इसके बाद, सौरव दास ने कहा कि सरकार के सकारात्मक रुख और कोर्ट के फैसले को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
हालांकि, दिल्ली पुलिस को उन 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है, जिनका आपराधिक इतिहास रहा है। इन व्यक्तियों पर शारीरिक नुकसान या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
इस पर, एडवोकेट हरिहरन ने मांग की कि उन व्यक्तियों की सूची प्रस्तुत की जाए जिनके खिलाफ यह कार्रवाई की जाएगी।
आगे की संभावनाएं
इस आदेश के बाद, सरकार को तीन महीने के भीतर मुआवजे की नीति तैयार करनी होगी। यह नीति छात्रों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी।
इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय से उम्मीद है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट का संदेश
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “अगर दोनों पक्ष आपसी विश्वास दिखाएं, तो सभी मुद्दे हल किए जा सकते हैं।” इस संदेश से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे विवादों का समाधान आसानी से हो सकेगा।
इस फैसले से न सिर्फ प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत मिली है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता का भी प्रमाण है।



