Brij Bhushan Sharan Singh Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) प्रमुख और पूर्व बीजेपी सांसद बृज भूषण शरण सिंह तथा पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया है। यह फैसला इस लंबे समय से चल रहे हाई-प्रोफाइल मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
1,133 दिन और 127 सुनवाई के बाद फैसला
महिला पहलवानों से जुड़े इस मामले में अदालत का फैसला करीब 1,133 दिनों की कानूनी प्रक्रिया और 127 सुनवाइयों के बाद आया। 2 जुलाई 2026 को मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। फैसला 3 अगस्त को सुनाया गया।
मामले में छह महिला पहलवानों की शिकायतें शामिल थीं। दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में दाखिल आरोपपत्र में बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ महिलाओं की गरिमा भंग करने, यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराओं में आरोप लगाए थे।
बृज भूषण के खिलाफ किन धाराओं में लगे थे आरोप?
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A, 354D और 506 के तहत आरोप लगाए गए थे। मई 2024 में अदालत ने बृज भूषण के खिलाफ कुछ आरोप तय करने का आदेश दिया था, जबकि छह शिकायतकर्ताओं में से एक की शिकायत के मामले में उन्हें आरोपमुक्त किया गया था। विनोद तोमर के खिलाफ भी आरोप तय किए गए थे।
दोनों आरोपी इस मामले में जमानत पर थे।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 2023 में उस समय देशभर में सुर्खियों में आया, जब कई शीर्ष महिला पहलवानों ने तत्कालीन WFI प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन भी किया था।
मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने बृज भूषण के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया और इसके बाद अदालत में लंबी सुनवाई चली। जुलाई 2026 में ट्रायल पूरा होने के बाद अदालत ने अंतिम फैसला सुनाने के लिए 3 अगस्त की तारीख तय की थी।
अब आगे क्या होगा?
बरी किए जाने के इस फैसले के बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर भी नजरें बनी रहेंगी। अदालत के फैसले ने एक ओर बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी ओर यह मामला महिला पहलवानों और भारतीय कुश्ती से जुड़े विवादों के कारण एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या बृज भूषण शरण सिंह को बरी करने के फैसले के बाद इस मामले की कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी?
क्या आपको लगता है कि इतने लंबे समय तक चले इस मामले का फैसला भारतीय खेल व्यवस्था के लिए कोई बड़ा संदेश देता है? क्या अदालत के फैसले के बाद भी इस मामले पर सार्वजनिक बहस जारी रहनी चाहिए?
आप इस फैसले को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



