इंदौर के गंदे पानी को लेकर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल, सीएम की बैठक में महापौर को छोड़ मुंह पर ताला मारे बैठे रहे नेता

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इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से 10 लोगों की मौत का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। यही वजह है कि कल यानी बुधवार को सीएम इंदौर आए। अस्पताल जाकर पीड़ितों से मिले। बैठक में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ चर्चा की। विडंबना यह रही कि इस बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव को छोड़ किसी भी मंत्री, विधायक या अन्य नेता ने अपना मुंह नहीं खोला।

बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घटना की पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति और अब तक की गई व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली तथा स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे इंतजाम सुनिश्चित किये जायेंगे जिससे की घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो।

महापौर के अलावा किसी ने कुछ नहीं बोला

बैठक में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्पमित्र भार्गव, विधायक मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला मौजूद थे। सूत्र बताते हैं कि महापौर के अलावा किसी ने इस घटना पर कुछ नहीं बोला। सब चुप्पी साधे रहे, जिसके कारण तत्काल कोई निर्णय नहीं हो पाया। इस बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव सीएम सचिवालय नीरज मण्डलोई, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाडे़, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव सहित कई अधिकारी मौजूद थे।

मजबूरी में एसीएस दुबे को इंदौर छोड़ना पड़ा

जब किसी जनप्रतिनिधि ने कुछ नहीं बोला। न किसी पर कार्रवाई की बात कही गई और न ही कोई सुझाव दिए गए तब सीएम ने नगरीय प्रशासन विभाग केअपर मुख्य सचिव संजय दुबे को इंदौर में ही तैनात रहने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि नगर निगम की आवश्यकता को देखते हुए पर्याप्त अमला और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। सीएम ने बताया कि वर्तमान में टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। जलापूर्ति पुनः प्रारंभ होने पर कहीं भी लीकेज या संदूषण की आशंका पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में जलापूर्ति शुद्ध पाई गई है, जबकि शेष हिस्सों में पुरानी एवं क्षतिग्रस्त लाइनों के कारण समस्या सामने आई है, जिन्हें दुरुस्त किया जा रहा है।

सीएम ने कहा-जांच के बाद होगी कार्रवाई

सीएम यादव ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर हुई किसी भी प्रकार की लापरवाही की जांच की जा रही है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों एवं एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, एक भी नागरिक को इस प्रकार का कष्ट होयह हमारी जिम्मेदारी है। जो हुआ वह दुखद है, लेकिन इससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी स्थिति बने, इसके लिए सरकार पूरी दृढ़ता से कदम उठाएगी।

जलकार्य प्रभारी के सामने पहचान का भी संकट

नगर निगम के जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा को बैठक में जाने के लिए भी काफी मशक्कत करना पड़ी। उन्हें अधिकारियों ने पहचाना नहीं और बैठक में जाने से रोक दिया। इंदौर में जल वितरण की व्यवस्था की जिम्मेदारी इन्हीं के पास है। इस घटना के बाद यह साफ है कि बबलू शर्मा शहर में कितने सक्रिय हैं। उनके सामने तो पहचान का भी संकट है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा अनुपस्थित रहे। बताया जाता है कि नए साल में वे भगवान द्वारकाधीश के दर्शन करने गए हैं।

लोगों को सीएम से थी कड़े एक्शन की उम्मीद

कल जब सीएम आए तो लोगों को कड़े एक्शन की उम्मीद थी। ऐसा तभी संभव होता, जब जनप्रतिनिधि खुलकर बोलते। घटनाक्रम के दोषियों का जिक्र करते या फिर कोई सुझाव देते। जब किसी ने कुछ बोला ही नहीं तो सीएम ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही। इससे पहले सीएम की सख्ती के बाद ही इस मामले में तीन अधिकारियों पर एक्शन हुआ है। अब उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद सीएम कोई सख्त एक्शन लेंगे।

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