इंदौर। लोक संस्कृति मंच द्वारा आयोजित मालवा उत्सव इस वर्ष 6 मई से दशहरा मैदान में आयोजित होने जा रहा है। इस बार का उत्सव जनजाति नृत्य व जनजाति लोक कला एवं महिला शक्ति को समर्पित होगा। देश भर के लोक कलाकार इस आयोजन में शामिल होंगे।
400 कलाकार और 300 शिल्पकार आएंगे
लोक संस्कृति मंच के संयोजक एवं सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि मालवा उत्सव ने देश व प्रदेश के साथ विश्व भर मे मालवा की छवि को एक अलग ही रंग में रंगने का काम किया है। इस आयोजन ने देश व प्रदेश में इंदौर को लोक कला के महत्वपूर्ण केंद्र का दर्जा दिलाया है। इस वर्ष 6 मई से 12 मई तक मालवा उत्सव का आयोजन दशहरा मैदान परिसर में किया जा रहा है। इसमें देशभर के विभिन्न राज्यों के 400 से अधिक लोक कलाकार एवं 300 शिल्पकार इस आयोजन में भाग लेंगे।
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मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ भूमिपूजन
मंच के संयोजक शंकर लालवानी ने बताया कि एक मई को प्रातः 9:30 बजे दशहरा मैदान पर भगवान गणेश के आवाहन के साथ भूमिपूजन किया गया। इस अवसर पर विधायक मालिनी गौड़ सहित अनेक नेता व लोक संस्कृति मंच के कार्यकर्ता मौजूद थे। मालवा उत्सव प्रतिदिन शाम 4 बजे से प्रारंभ होगा वही लोक नृत्यों की प्रस्तुति शाम 7 बजे से होगी।
मातृशक्ति की आराधना से सजेगा उत्सव
लोक संस्कृति मंच के सचिव दीपक लंवगड़े ने बताया कि इस वर्ष यह उत्सव जनजातीय नृत्यों, लोक नृत्यों के साथ जनजातीय कला की छाप लिए होगा साथ ही मातृशक्ति की आराधना की झलक इसमें दिखाई देगी। जनजाति समूह गौंड, कर्मा, आदिवासी, बरेदी, कोरकु आदि के साथ लंबाडी मालवा की मटकी, पंजाब का लोकप्रिय भांगड़ा, गुजरात का गरबा सहित पूर्व से लेकर पश्चिम तक एवं उत्तर से लेकर दक्षिण तक की संस्कृति एवं लोकलुभावन नृत्यों की प्रस्तुतियां प्रतिदिन देखने को मिलेंगी। इस वर्ष मुख्य रूप से गोवा की संस्कृति का परिचय भी मालवा उत्सव में होगा।
विभिन्न प्रदेशों की कलाकृतियां दिखेंगी
इस वर्ष जनजातीय कला के साथ देशभर की कला प्रदर्शित करने लगभग 300 शिल्पकार इस उत्सव में अपनी कलाकृतियां लेकर आएंगे। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम, असम, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल के कलाकार अपनी कला की छटा यहां बिखेरेंगे। शिल्प मेले मे काथा वर्क एवं ब्लैक पॉटरी खास रहेगी मिट्टी शिल्प, गलीचा शिल्प ,टेराकोटा ,ड्राई फ्लावर ,केन फर्नीचर, कपड़ा शिल्प, पीतल शिल्प, लौह शिल्प प्रमुख रूप से उपलब्ध रहेंगे।


