एआई  पर सख्ती: हर रचना पर अब अनिवार्य होगा स्पष्ट पहचान चिह्न

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता ए आई से तैयार या कृत्रिम रूप से निर्मित सामग्री को लेकर नए सख्त नियम प्रस्तावित किए हैं। इन प्रस्तावित बदलावों के तहत अब ऐसे किसी भी प्रकार की सामग्री पर लगातार और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला पहचान चिह्न लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार ने इस प्रारूप को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है और 7 मई तक आम लोगों तथा संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं।

नए प्रस्ताव में सबसे बड़ा परिवर्तन पहचान चिह्न के स्वरूप को लेकर किया गया है। पहले जहां ऐसी सामग्री पर केवल “प्रमुख रूप से दिखाई देने” वाला चिह्न पर्याप्त माना जाता था, वहीं अब इसे “पूरी अवधि के दौरान लगातार और स्पष्ट रूप से प्रदर्शित” करना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इसका अर्थ है कि वीडियो, चित्र या किसी भी दृश्य माध्यम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री को दर्शकों से छिपाया नहीं जा सकेगा।

इस प्रस्ताव की विशेष बात यह है कि यह नियम केवल बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों या सामाजिक माध्यम मंचों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि कोई सामान्य उपयोगकर्ता भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सामग्री तैयार करता है या साझा करता है, तो उसे भी इन नियमों का पालन करना होगा। यानी अब हर सामग्री निर्माता की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।

इस वर्ष की शुरुआत में सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  के लिए पहले ही सख्त नियम लागू किए थे, जिनके तहत अवैध सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य किया गया था। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कृत्रिम रूप से तैयार सामग्री पर स्पष्ट पहचान चिह्न भी आवश्यक कर दिया गया था।

सरकार का मानना है कि नई तकनीकों के विस्तार के साथ झूठी, भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री की समस्या तेजी से बढ़ी है। कृत्रिम वीडियो और संपादित माध्यमों के जरिए गलत जानकारी फैलाना आसान हो गया है, जिससे न केवल उपयोगकर्ताओं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक वातावरण पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में स्पष्ट पहचान चिह्न को अनिवार्य बनाना इस चुनौती से निपटने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यदि ये नियम लागू होते हैं, तो डिजिटल मंचों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और झूठी खबरों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि, कुछ लोग इसे सामग्री निर्माताओं के लिए चुनौती भी मान रहे हैं, क्योंकि इससे सामग्री बनाने और साझा करने की प्रक्रिया में अतिरिक्त जिम्मेदारी जुड़ जाएगी। फिर भी सरकार का यह प्रयास डिजिटल दुनिया में भरोसा और पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Abhilash Shukla (Editor)
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Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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