मणिपुर के कई पहाड़ी और घाटी जिलों में इस महीने हुई दो अलग-अलग संदिग्ध उग्रवादी घटनाओं के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इन घटनाओं के विरोध में बुलाए गए दोहरे बंद ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बाजार बंद हैं, स्कूल-कॉलेज नहीं खुल रहे और सार्वजनिक परिवहन लगभग ठप हो गया है।
पहली घटना 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंग्लाओबी इलाके में हुई, जहां एक घर पर बम हमला किया गया। इस दर्दनाक हमले में एक 5 वर्षीय बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गईं। इस घटना के बाद 11 अप्रैल से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
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इसके बाद कुकी-जो बहुल चुराचांदपुर जिले के गेलमोल गांव में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव हुआ, जिसमें सीआरपीएफ की फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। इसी बीच इम्फाल के थांगमेइबंद इलाके में मशाल जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस संघर्ष में कुल छह लोग घायल हुए, जिनमें तीन सीआरपीएफ जवान भी शामिल हैं। हालात काबू करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज, आंसू गैस, रबर बुलेट और हवाई फायरिंग का सहारा लिया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की।
इन घटनाओं के बाद कई नागरिक संगठनों, ने पांच दिन के पूर्ण बंद का ऐलान कर दिया। दूसरी ओर, यूनाइटेड नागा काउंसिल ने भी अलग से बंद बुलाया है।
यह बंद 18 अप्रैल को लिटन गांव के पास हुए एक अन्य हमले के विरोध में है, जिसमें भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त जवान की कथित रूप से घात लगाकर हत्या कर दी गई थी।
मंगलवार को भी राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे। लोग सड़कों पर उतरकर पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।


