इंदौर। धार भोजशाला विवाद मामले में सोमवार को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने पांच याचिकाओं को एक साथ सुना। कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता आशीष गोयल की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी ने पैरवी की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सबसे पहले हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने न्यायालय के पटल पर भोजशाला का परमार कालीन इतिहास रखा तथा राजा भोज के समय के तथ्यों पर प्रकाश डाला। जैन द्वारा बताया गया कि मुस्लिम आक्रांता के आने के पश्चात कई बार भोजशाला को मस्जिद में बदलने का असफल प्रयास किया गया। यहां तक की भोजशाला को ध्वस्त करके उसके मलबे का भी उपयोग किया गया है। जैन द्वारा भोजशाला को लेकर अभी तक लगाए गए सभी याचिका और मामलों पर भी अपने तर्क रखे गए। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर याचिका की प्रमुख मांगों को लेकर भी जैन ने माननीय न्यायालय को बताया कि भोजशाला पर हिंदू समाज का पूर्ण आधिपत्य हो, नमाज हमेशा के लिए बंद हो, माँ वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से लाकर भोजशाला में स्थापित किया जाए, माता सरस्वती की निर्बाध रूप से पूजा हो।
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सुनवाई के दौरान मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से कुछ वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। कोर्ट के समक्ष यह पक्ष भी रखा गया कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में उल्लेख है कि भोजशाला का निर्माण 11वीं सदी में हुआ था। उस समय मालवा में मुगलों का प्रवेश नहीं हुआ था, इसलिए मस्जिद होने का सवाल नहीं उठता।
एएसआई ने 98 दिनों तक किया था सर्वे
उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट के निर्देश पर एएसआई ने 98 दिनों तक भोजशाला का सर्वे किया था और दो हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई। पिछली सुनवाई में मुस्लिम पक्ष ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। एक पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी और रंगीन चित्रों की मांग भी की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था।अब इस मामले में मंगलवार को फिर सुनवाई होगी।


