खाकी पर दाग : आखिर कौन है चंदन नगर टीआई इंद्रमणि पटेल का आका, जिसे हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को देना पड़ा आदेश

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इंदौर। इन दिनों इंदौर के चंदन नगर टीआई इंद्रमणि पटेल की चर्चा प्रदेश ही नहीं देश में भी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट तक हैरान है कि आखिर यह कौन शख्स है, जिसे इतने गलत करने बाद भी हटाया नहीं गया। मध्यप्रदेश के पुलिस विभाग के अफसर और कर्मचारी भी दंग हैं कि जिस व्यक्ति ने पूरे देश में प्रदेश पुलिस को बदनाम किया, उस पर मेहरबानी कौन दिखा रहा है? अंतत: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पटेल को लाइन अटैच करने का आदेश जारी हुआ।

उल्लेखनीय है कि कानून के छात्र असद अली वारसी ने 156 प्रकरणों की सूची कोर्ट में पेश की थी, जो टीआइ इंद्रमणि पटेल की पदस्थापना के दौरान (23 अक्टूबर 2023 से 23 अक्टूबर 2024) दर्ज किए गए थे। इन प्रकरणों में सलमान पुत्र जुल्फिकार कुरैशी निवासी नालापार (चंदननगर) और आमिर पुत्र उस्मान रंगरेज निवासी आमवाला रोड (चंदननगर) को 165 से ज्यादा मामलों में गवाह बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-तत्काल हटाएं

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस एहसानुद्दीन अमानउल्ला और जस्टिस आर. महादेवन ने इसे गंभीरता से लिया। कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिए कि वह शासन, सीपी को सूचित करें और संबंधित टीआई पटेल को लाइनअटैच किया जाए। भले ही सुप्रीम कोर्ट का आर्डर कभी भी अपलोड हो लेकिन आर्डर अपलोड होने का इंतजार नहीं करें, उन्हें लाइनअटैच किया जाए। साथ ही अगले आदेश तक उन्हें किसी भी थाने में कोई काम नहीं दिया जाए। इसका पालन सुनिश्चित कराया जाए।

अवर हुसैन की जमानत से खुली पोल

यह पूरा मामला अनवर हुसैन की जमानत याचिका से खुला। हुसैन पर पुलिस ने हाईकोर्ट में चार की जगह आठ अपराध बताए, इसके चलते हाईकोर्ट में जमानत नहीं हुई। मामला सुप्रीम कोर्ट गया। इसमें पुलिस ने गलती मानी कि एक ही नाम के दो आरोपी होने से आठ केस गलती से बता दिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर माना और फटकार लगाई।

हर घटना के वक्त आमिर और सलमान

कानून के छात्र असद द्वारा आमिर और सलमान का रिकॉर्ड कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था। उसमें विवेचक, गवाहों के नाम और केस की जानकारी थी। न्यायमूर्ति ने टीआइ को तलब कर फटकार लगाई। न्यायमूर्ति ने कहा एसएचओ लोगों के प्रोटेक्शन के लिए होता है। कोर्ट ने कहा कि हर घटना के वक्त आमिर और सलमान ही क्यों मौजूद रहते हैं।

पुलिस विभाग में बड़ी सर्जरी की जरूरत

इस पूरे मामले ने मध्यप्रदेश पुलिस पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इससे यह जाहिर है कि पुलिस विभाग में क्या चल रहा है। सीएम डॉ.मोहन यादव पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर रहे हैं। कई बार उन्होंने एक्शन भी लिया है। इसके बाद भी पटेल जैसे लोग पुलिस को बदनाम करने पर तुले हुए हैं। इसका मतलब साफ है कि पुलिस में सरकार से अलग एक अलग ही व्यवस्था चल रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश पुलिस में सफाई के लिए एक बड़े प्रशासनिक सर्जरी की जरूरत है।

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