चलो गणतंत्र दिवस के बहाने ही सही नजर तो आए भाजपा के ‘बांका’, भागीरथपुरा कांड के बाद जनता कर रही थी तलाश

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इंदौर। आज पूरे देश में के साथ ही इंदौर भी गणतंत्र दिवस समारोह की खुशियों से सराबोर रहा। नेता, अभिनेता, समाजसेवी, शिक्षण संस्थान से लेकर सभी झंडावंदन में व्यस्त दिखे। भागीरथपुरा के दूषित पानी कांड के बाद पहली बार भाजपा नेताओं के चेहरे पर खुशहाली दिखी। खास बात यह कि भाजपा के ‘बांका’ यानी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी भाजपा कार्यालय पर झंडावंदन की परंपरा निभाने पहुंचे। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को मिठाई खिलाकर बधाई भी दी।

अब जनता में चर्चा है कि चलो गणतंत्र दिवस के बहाने ही सही भाजपा के ‘बांका’ नजर तो आए। जब भागीरथपुरा का दूषित पानी कांड हुआ था तो वे पुराने वर्ष को विदाई देने तीर्थयात्रा पर गए थे। इसके बाद जब वे आए तो भागीरथपुरा ही नहीं इंदौर के भाजपा कार्यकर्ताओं को और लोगों को उम्मीद थी कि वे अपना कुछ जौहर दिखाएंगे, लेकिन आदतानुसार वे अपने दड़बे में बंद रहे। भागीरथपुरा मामले पर न तो उनका कोई बयान आया और न ही संगठन स्तर पर कोई कार्रवाई ही।

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लोग पूछ रहे हैं-आखिर यह चुप्पी क्यों?

इंदौर के लोग और भाजपा के कार्यकर्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े मुद्दे पर ऐसी पार्टी का अध्यक्ष जिसके 9 विधायक हैं, एक सांसद है, एक महापौर तथा नगर निगम की पूरी परिषद है, वह चुप क्यों है? माना कि आप मंत्री को सजा नहीं दे सकते, महापौर को कुछ नहीं कह सकते, कम से कम पार्षद स्तर पर तो कुछ कर सकते थे। इतना ही नहीं तो अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं के माध्यम से ही जनता को विश्वास दिलाने की कोशिश भी तो हो सकती थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं।

मंत्रीजी को भी नहीं कर पाए सपोर्ट

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के समर्थन से सुमित मिश्रा नगर अध्यक्ष की कुर्सी तक तो आ गए, लेकिन इस पूरे मामले में वे मंत्रीजी को भी सपोर्ट नहीं कर पाए। ऐसे समय जब मंत्री विजयवर्गीय को ही विरोध का सामना करना पड़ा और भागीरथपुरा में पूरा माहौल बिगड़ गया था, भाजपा के ‘बांका’ ने मंत्रीजी को भी बचाने की कोशिश नहीं की। अगर वे चाहते तो अपने जमीनी कार्यकर्ताओं के माध्यम से माहौल को बिगड़ने से रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने तो कांग्रेस के नेताओं के लिए पूरा मैदान ही साफ छोड़ दिया।

कालिख कांड पर भी चुप्पी से उठे थे सवाल

इससे पहले जब नगर कार्यकारिणी घोषित हुई थी, तब विरोध इतना जबरदस्त हुआ कि इंदौर के इतिहास में पहली बार भाजपा कार्यालय पर अपने ही नगर अध्यक्ष के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। पुतले जलाए गए, नारे लगाए गए, पोस्टर के साथ ही भाजपा कार्यालय में घुसकर नगर अध्यक्ष के नेमप्लेट पर कालिख पोती गई। तब भी मिश्राजी से लोग कड़े एक्शन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन वे एकांतवाश में चले गए थे।

बिल्ली के भाग्य से टूटा था झींका

इस मामले में भाजपा के ‘बांका’ की किस्मत अच्छी थी कि प्रदर्शन करने वाले गुट के एक नेता उनसे मिलने पहुंच गए। कालिख पोतने वाले ने क्षमा मांग ली और बिल्ली के भाग्य से झींका टूट गया।‘बांका’ इसी में खुश हो गए कि चलो सामने वाले ने क्षमा मांग ली। इस चुप्पी को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक में आज भी नाराजगी है। लोग कह रहे हैं कि ऐसे में विरोध करने वालों का हौसला और बुलंद होगा। लोग चाहते थे कि भाजपा जैसे अनुशासन वाले संगठन में कम से कम ऐसा करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तो हो।

नगर कार्यकारिणी में बैकडोर एंट्री भी विवादों में

भाजपा की नगर कार्यकारिणी में ‘बांका’ ने कुछ ऐसे लोगों को बैक डोर एंट्री दे दी, जिस पर आज भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसमें सबसे प्रमुख नाम इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से जुड़ीं डॉ.दीप्ति हाड़ा का है, जिसे ‘बांका’ ने कार्यकारिणी में न केवल जगह दी, बल्कि उपाध्यक्ष पद भी दिया। अब चर्चा है कि भाजपा में नए आए धन्नासेठ अक्षत चौधरी को भाजयुमो का अध्यक्ष बनाने का वादा भी ‘बांका’ ने कर लिया है। भले ही अध्यक्ष न बना पाएं लेकिन कहीं न कहीं चौधरी का एडजस्ट होना तय है।

एयरपोर्ट पर भी हो चुके कई कांड

भाजपा के बांका के कार्यकाल में ही इंदौर विमानतल पर आए नेताओं के स्वागत के दौरान कई कांड हो चुके हैं। इसके दो ताजा उदाहरण हैं, जब प्रदेश के संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को ही एयरपोर्ट पर प्रवेश नहीं मिला। इससे बड़ा मामला तब सामने आया, जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा से एयरपोर्ट पर मिलने के लिए मेडिकल कॉलेजों को फर्जी मान्यता दिलाने का आरोपी सुरेश भदौरिया पहुंच गया। उसे ‘बांका’ की कमेटी की उपाध्यक्ष डॉ.दीप्ति हाड़ा ने स्वास्थ्य मंत्री से मिलवाने की कोशिश की। तब भी सवाल उठे कि एक ऐसे आरोपी जिसकी तलाश आयकर, ईडी, सीबीआई से लेकर सारी एजेंसियां कर रही हैं, वह स्वास्थ्य मंत्री के स्वागत में कैसे पहुंचा।

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