भाजपा इंदौर महानगर के मंडल से मराठी समाज गायब, आठ बार की सांसद रहीं सुमित्रा महाजन के क्षेत्र में यह हाल

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इंदौर। भाजपा इंदौर महानगर के मंडल अध्यक्षों और मंडल प्रतिनिधियों की सूची जारी हो गई है, लेकिन इसमें मराठी समाज गायब सा दिख रहा है। इंदौर लोकसभा सीट से आठ बार सांसद रहीं पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के क्षेत्र में मराठी समाज का यह हाल कल्पना से परे है। वह भी ऐसे समय जबकि नगर अध्यक्ष के पद पर मराठी समाज से ही गौरव रणदिवे बैठे हुए हैं।

नाम न छापने की शर्त पर भाजपा से जुड़े एक मराठी समाज के समाजसेवी ने कहा कि विधानसभा में लगातार मांग के बाद भी समाज के किसी नेता को टिकट नहीं दिया गया, अब संगठन की नियुक्तियों में भी नजरअंदाज किया जा रहा है। इस समजासेवी ने कहा कि मराठी समाज आंखें मूंदकर भाजपा को सपोर्ट करता रहा है, लेकिन उसकी ऐसी गत बना दी जाएगी, इसकी कल्पना नहीं थी। मराठी समाज से जुड़े एक और नेता ने कहा कि इंदौर की कई विधानसभा सीटों पर मराठी वोटरों के भरोसे जीत रही भाजपा से ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि ताई के जाने के बाद से यह समाज राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गया है। जब उनसे यह पूछा गया कि नगर अध्यक्ष तो इसी समाज से हैं, फिर उन्होंने कहा कि इसका परिणाम तो सामने दिख ही रहा है। बार-बार टिकट मांगने के बाद भी नगर अध्यक्ष को टिकट नहीं मिला।

एक नंबर में आकाश तैयार कर रहे अपनी जमीन

मंडल अध्यक्षों की सूची पर नजर डालें, तो विधानसभा एक में आकाश विजयवर्गीय पूरी तरह हावी दिख रहे हैं। और इतने हावी दिख रहे हैं कि एक आपराधिक प्रवृत्ति का मंडल अध्यक्ष भी बना दिया है। अब कहा जा रहा है कि आकाश विधानसभा एक में अपने लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं और इसी वजह से मनमाने तरीके से नियुक्तियां की हैं।

विधानसभा दो में दादा ने उतारे कई नए चेहरे

विधानसभा दो में रमेश मेंदोला ने न केवल जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है, बल्कि कई नए चेहरे भी उतारे हैं। दादा हमेशा अपनी टीम को मजबूत करते रहते हैं, इसी कोशिश में इस बार फेरबदल भी किया गया है। दादा की विधानसभा में दो मंडल अध्यक्षों की घोषणा अभी रोकी भी गई है। विधानसभा तीन में पहले तीन मंडल थे, अब चार हो गए हैं। विधायक गोलू शुक्ला ने तीन मंडल अध्यक्ष तो पुराने ही रखे हैं, जबकि एक नया नियुक्त किया है।

चार नंबर में तीन नेताओं के बीच रही खींचतान

विधानसभा चार में विधायक मालिनी गौड़ के अलावा महापौर पुष्यमित्र भार्गव और सांसद शंकर लालवानी के बीच खींचतान मची रही। पांच नंबर में महेंद्र हार्डिया की एकतरफा चली, लेकिन कहा जा रहा है कि नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने भी अपने एक-दो जुड़वा दिए हैं। राऊ में विधायक मधु वर्मा ने सबके साथ समन्वय बिठाने की कोशिश की है।

नहीं दिखा महिलाओं का 33 प्रतिशत आरक्षण

भाजपा की गाइडलाइन के हिसाब से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाना था, लेकिन 33 घोषित नामों में से सिर्फ दो महिलाएं ही नजर आईं। इसी तरह पार्टी ने कहा था कि किसी आपराधिक व्यक्ति को पद नहीं दिया जाए, लेकिन विधानसभा एक में एक ऐसा नाम नजर आ रहा है।

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