नागपुर। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने लगभग 11 साल हो गए हैं। ऐसे में आज यानी 30 मार्च को वे नागपुर पहुंचे। इस यात्रा के कई राजनीतिक अर्थ लगाए जा रहे हैं। यह यात्रा भाजपा और संघ के बीच पिछले कुछ समय से आ रही दूरियों को कम करने की कोशिश भी मानी जा रही है। अभी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी है। माना जा रहा है कि मोदी की इस यात्रा से यह मुद्दा भी जुड़ा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से कई बार भाजपा और संघ के संबंधों को लेकर चर्चा हुई है। कई बार भाजपा और संघ के नेताओं से इस संबंध में सवाल भी पूछे गए हैं। अक्सर ऐसे जवाब टाले ही गए हैं। यहां तक कि संघ के नेताओं द्वारा यह भी कहा गया है कि भाजपा एक स्वतंत्र संगठन है और वह अपने फैसले खुद लेती है। यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा भाजपा ने 400 पार का नारा दिया था, लेकिन लक्ष्य काफी पीछे रह गया। इसका एक प्रमुख कारण इस चुनाव में संघ की सक्रिता नहीं होना माना जा रहा है। हिंदी बेल्ट में सीटें घटीं, जिससे चिन्ता और बढ़ी। हालांकि इसके बाद हुए महाराष्ट्र के चुनाव में फिर से संघ ने अपनी ताकत लगाई और उसी की बदौलत भाजपा की नैया पार हो सकी।
नड्डा की टिप्पणी के बाद से कई सवाल
उल्लेखनीय है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म होने वाला है। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की कवाय चल रही है। ऐसे में नड्डा के उस बयान की भी चर्चा है जिसमें उन्होंने कहा था कि अब चुनाव जीतने के लिए भाजपा को संघ की उतनी जरूरत नहीं पड़ती। उस समय किसी ने खुलकर तो कुछ नहीं बोला, लेकिन बताया जाता है कि संघ के नेताओं में इसको लेकर काफी नाराजगी थी। अब जबकि फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष की कवायद शुरू हो गई है, निश्चित तौर पर मोदी संघ को विश्वास में लेकर ही कुछ तय करना चाहते होंगे।
दिल्ली के बाद अब बंगाल पर नजर
भाजपा ने दिल्ली विधानसभा में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इसके बाद उसका अगला लक्ष्य पश्चिम बंगाल है, जहां पिछली बार लाख कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिल पाई थी। मोदी की इस यात्रा के प्रमुख बिंदुओं में से एक यह भी माना जा रहा है। अगर बंगाल में संघ का साथ मिल जाए तो रास्ता आसान हो सकता है। मोदी के इस दौरे से पिछले लगभग 11 साल के दौरान भाजपा और संघ के बीच कई छोटी-मोटी दीवारें तोड़ने का भी काम करेगी।


