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केरल: माकपा नेता जी सुधाकरन पर 1989 के डाक मतपत्र मामले में केस दर्ज,
केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री जी सुधाकरन के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत शुक्रवार को मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई उनके एक हालिया बयान पर की गई है, जिसमें उन्होंने 1989 के अलप्पुझा लोकसभा चुनाव के दौरान डाक मतपत्रों को खोले जाने का दावा किया था।
चुनाव आयोग ने सुधाकरन के बयान पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए गुरुवार को जांच शुरू की थी। सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर वायरल हुए वीडियो में सुधाकरन को यह कहते हुए सुना गया कि उन्होंने उस समय सीलबंद डाक मतपत्रों को खोला, उनकी जांच की, और यह देखा कि किसने किसे वोट दिया।
वीडियो में सुधाकरन यह भी कहते नजर आए कि जो लोग सीलबंद मतपत्र जमा करते हैं, उन्हें यह नहीं मानना चाहिए कि हमें यह पता नहीं चलेगा कि उन्होंने किसे वोट दिया है, क्योंकि हम उन्हें खोलेंगे, सत्यापित करेंगे और सही करेंगे।”
सुधाकरन ने यह दावा किया कि जब केएसटीए नेता केवी देवदास अलप्पुझा से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे, तब डाक मतपत्रों को जिला समिति कार्यालय में खोला गया और यह सामने आया कि एनजीओ यूनियन के लगभग 15 फीसदी सदस्यों ने विरोधी उम्मीदवार को वोट दिया था।
बयान के वायरल होने के बाद विवाद गहराया, जिसके बाद सुधाकरन ने सफाई दी। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा मैंने जो कहा था, वह पूरा सच नहीं था। मेरा उद्देश्य केवल यह था कि मैं उन लोगों को चेतावनी दूं जो इस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं और उन्हें यह बताना था कि हमें पता है कि वे क्या कर रहे हैं।
चुनाव आयोग की जांच और दर्ज केस के बाद अब यह मामला केरल की राजनीति में नया मोड़ ले सकता है, खासकर चुनावी पारदर्शिता और गोपनीयता के सवालों को लेकर।



