भारत में एकीकृत सैन्य कमान की दिशा में बड़ा कदम: सरकार ने अंतर-सेवा संगठन अधिनियम के नियम अधिसूचित किए
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम रक्षा-सुधार कदम उठाया है। सेना, नौसेना और वायु सेना में बेहतर समन्वय और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एकीकृत सैन्य कमान की दिशा में नियमों को अधिसूचित कर दिया है।
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रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये नियम अंतर-सेवा संगठन (कमांड, नियंत्रण और अनुशासन) अधिनियम 2023 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं। इस अधिनियम का उद्देश्य सशस्त्र बलों के भीतर अधिक संयुक्तता और कमांड दक्षता को सुदृढ़ करना है। इन नियमों को 8 मई 2024 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से जारी किया गया और 10 मई 2024 से प्रभाव में लाया गया है।
यह अधिनियम अंतर-सेवा संगठनों (आईएसओ) के प्रभावी संचालन के लिए तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य उनके कमांड, नियंत्रण और अनुशासन को सशक्त बनाना है। इससे थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्तता और तालमेल को नया बल मिलेगा।
मानसून सत्र 2023 में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित इस विधेयक को 15 अगस्त 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। अधिनियम के तहत अब आईएसओ के कमांडर-इन-चीफ और ऑफिसर-इन-कमांड को अपने अधीन तैनात कर्मियों पर पूर्ण नियंत्रण और अनुशासन बनाए रखने का अधिकार प्राप्त होगा, वह भी प्रत्येक सेवा की विशिष्ट सेवा शर्तों को बिना प्रभावित किए।
इस नए ढांचे के लागू होने से आईएसओ प्रमुखों को प्रशासनिक निर्णयों में अधिक स्वायत्तता और त्वरित कार्रवाई की सुविधा मिलेगी, जिससे सशस्त्र बलों के भीतर तेज़, प्रभावी और समन्वित कार्यप्रणाली का मार्ग प्रशस्त होगा।
यह अधिनियम भारत की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक चुस्त, आधुनिक और एकीकृत बनाने की दिशा में एक रणनीतिक और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।



